बुढ़ापा बीमारी नहीं, सही देखभाल से बन सकता है खुशहाल जीवन
बुढ़ापा बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का स्वाभाविक पड़ाव है, जिसकी अपनी अलग ज़रूरतें और चुनौतियाँ होती हैं।
बुढ़ापा कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन की एक स्वाभाविक और सम्मानजनक अवस्था है। जैसे बचपन और युवावस्था की अपनी अलग ज़रूरतें होती हैं, वैसे ही बुढ़ापे की भी अपनी खास ज़रूरतें और चुनौतियां होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर और मन में कुछ बदलाव आना बिल्कुल सामान्य है, लेकिन अक्सर इन्हीं बदलावों को हम बीमारी समझ बैठते हैं।
बुढ़ापे में थकान महसूस होना, शरीर में कमजोरी आना, याददाश्त का थोड़ा कमजोर होना या चलने-फिरने में परेशानी होना स्वाभाविक है। ये बदलाव धीरे-धीरे आते हैं और सही देखभाल से इन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि बुज़ुर्गों को समय पर ध्यान, प्यार और सहयोग मिले, तो वे इस उम्र में भी स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवन जी सकते हैं।
इस उम्र में सबसे ज्यादा जरूरत मानसिक शांति और भावनात्मक सहारे की होती है। अकेलापन, उपेक्षा और असुरक्षा की भावना बुज़ुर्गों को जल्दी घेर लेती है। परिवार के साथ बैठकर बातचीत करना, उनके अनुभवों को सुनना और उन्हें सम्मान देना उनके मन को मजबूत बनाता है। जब मन प्रसन्न रहता है, तो शरीर भी बेहतर तरीके से काम करता है। इससे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं कम होती हैं और नींद व भूख भी सुधरती है।
शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बुढ़ापे में बहुत कठिन व्यायाम जरूरी नहीं होता। रोज़ाना हल्की सैर, योग, प्राणायाम और आसान स्ट्रेचिंग शरीर को सक्रिय रखने के लिए पर्याप्त हैं। खान-पान पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है। ताजा और संतुलित भोजन, हरी सब्जियां, फल, दूध, दही और पर्याप्त पानी शरीर को जरूरी पोषण देते हैं। ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए इससे परहेज करना चाहिए।
घर पर की जाने वाली छोटी-छोटी देखभाल भी बहुत लाभकारी होती है। पैरों में तेल की मालिश से नींद बेहतर होती है, गुनगुने पानी से नहाने से जोड़ों का दर्द कम होता है और आंखों को आराम देने से देखने की परेशानी घटती है। साफ-सफाई, दांतों और मुंह की देखभाल, नियमित स्नान और स्वच्छ कपड़े पहनना बुज़ुर्गों के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।
इसके साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। ब्लड प्रेशर, शुगर, आंखों, कानों और हड्डियों की समय-समय पर जांच कराने से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। दवाएं सही समय पर लेना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है।
सबसे अहम बात यह है कि बुज़ुर्गों को उनकी क्षमता के अनुसार घर के छोटे-छोटे कामों में शामिल रखा जाए, ताकि वे खुद को बोझ नहीं, बल्कि परिवार का अहम हिस्सा महसूस करें। सम्मान, देखभाल और प्रेम से भरा माहौल बुढ़ापे को भी जीवन का सबसे सुंदर पड़ाव बना सकता है।
With Inputs From IANS