कोलकाता में स्टेम सेल थेरेपी से बचा मरीज का पैर, PAD इलाज में बड़ी सफलता

कोलकाता में स्टेम सेल थेरेपी से PAD मरीज का पैर बचा।

Update: 2026-01-28 10:30 GMT

कोलकाता: पूर्वी भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेर्वा प्रदाताओंमेंसेएक, मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की इकाई मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवेनेउन्नत पेरिफे िल आटेरियल णडजीज (PAD) सेपीण़ित 62 वर्षीय पुरुर्ष मिीज पि पहली बाि सफलतापूववक स्टेम सेल थेिेपी की है। कोलकाता णनर्वासी सेर्वाणनर्वृत्त सरकारी कममचारी आशीष मुखर्जी (नाम पररर्वणतमत) का यह र्जणटल उपचार डॉ. जयंत दास, कं सल्टेंट – वैस्कु लि एवं एं डोवैस्कु लि सजविी, मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवेतथा डॉ. कृष्णेंदुमुखजी, कं सल्टेंट – वैस्कु लि एवं एं डोवैस्कु लि सजविी, मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवेकी णवशेर्षज्ञता मेंणकया गया। मरीर्ज लंबेसमय सेधूम्रपान करता था और लगभग एक र्वषमपहलेउसेPAD का पता चला था।

उस समय उसेएं णर्जयोप्लास्टी और आर्वश्यकता पड़ने पर स्टेंट लगानेकी सलाह दी गई थी। पेररफे रल आटेररयल णिर्जीर्ज (PAD) एक ऐसी बीमारी हैणर्जसमेंपैरोंकी रक्त नणलकाएं संकरी हो र्जाती हैंया अर्वरुद्ध हो र्जाती हैं, णर्जससेरक्त प्रर्वाह कम हो र्जाता है। इसकेकारि पैरोंमेंददम, न भरनेर्वालेघार्व और गंभीर मामलोंमेंसंक्रमि या अंग णर्वच्छे दन तक की स्पिणत उत्पन्न हो सकती है। धूम्रपान, मधुमेह और उच्च कोलेस्टर ॉल इसके प्रमुख कारि हैं।

हालांणक, णनयणमत फॉलो-अप न होनेऔर बीमारी केबढ़नेके कारि मरीर्ज बाद मेंगंभीर णक्रणटकल णलम्ब इस्के णमया की स्पिणत मेंअिताल पहंचा, णर्जसमेंहाथ या पैर मेंरक्त प्रर्वाह पूरी तरह बाणधत हो र्जाता है, साथ ही एक सणक्रय न भरनेर्वाला घार्व भी मौर्जूद था। उन्नत एं णर्जयोग्राफी मेंयह सामने आया णक धमणनयोंके भीतर रक्तप्रर्वाह केणलए आर्वश्यक खोखला भाग (आटेररयल ल्यूमेन) णदखाई नही ंदेरहा था, णर्जसके कारि पारंपररक सर्जमरी या एं िोर्वैस्कु लर उपचार संभर्व नही ंथा।

ऐसेमेंअंग णर्वच्छे दन ही एकमात्र णर्वकल्प बचा था। इस स्पिणत मेंिॉ. र्जयंत दास के नेतृत्व मेंणचणकत्सा टीम ने स्टेम सेल थेरेपी का सुझार्व णदया। यह एक ऐसी उपचार पद्धणत हैणर्जसमेंणर्वशेष कोणशकाओंका उपयोग कर क्षणतग्रस्त ऊतकोंकी मरम्मत की र्जाती हैऔर रक्त प्रर्वाह को बेहतर बनानेमेंमदद णमलती है, खासकर तब र्जब अन्य उपचार णर्वकल्प संभर्व न हों। मरीर्ज को उपचार केणदन ही अिताल मेंभती णकया गया और अगलेही णदन उसेछु ट्टी देदी गई।

उल्लेखनीय रूप से, उपचार के 24 घंटेके भीतर ही मरीर्ज को तीव्र ददमसेपूरी तरह राहत णमल गई। आनेर्वालेछह सप्ताह मेंघार्व के भरनेकी प्रगणत का आकलन णकया र्जाएगा। इस मामलेपर बात करतेहए डॉ. जयंत दास नेकहा, “उन्नत पेररफे रल आटेररयल णिर्जीर्ज में, र्जब रक्त नणलकाओंके पूरी तरह बंद हो र्जानेके कारि एं णर्जयोप्लास्टी या बायपास सर्जमरी संभर्व नही ंहोती, तब स्टेम सेल थेरेपी अंग बचानेका एक महत्वपूिमणर्वकल्प बनकर उभरती है। इस मरीर्ज के पास कोई प्रभार्वी सणर्जमकल णर्वकल्प नही ंथा और अंग णर्वच्छे दन का खतरा बहत अणधक था।

स्टेम सेल थेरेपी के पररिामस्वरूप 24 घंटेके भीतर ही गंभीर आराम के समय होनेर्वालेददममेंिष्ट कमी आई, र्जो णक्रणटकल णलम्ब इस्के णमया केमरीर्जोंमेंरक्त प्रर्वाह और र्जीर्वन की गुिर्वत्ता सुधारने की क्षमता को दशामता है।” इस पर डॉ. कृष्णेंदुमुखजी नेकहा, “गंभीर धमणनयोंकेअर्वरोध केकारि होनेर्वाली णक्रणटकल णलम्ब इस्के णमया मेंउपचार केणर्वकल्प बहत सीणमत रह र्जातेहैंऔर कई मामलोंमेंमरीर्जोंको अंग णर्वच्छे दन की ओर धके ल णदया र्जाता है।

इस मामलेमें, सभी पहलुओंका गहन मूल्यांकन करनेकेबाद स्टेम सेल थेरेपी की योर्जना बनाई गई और उसेसफलतापूर्वमक लागूणकया गया, क्ोंणक कोई भी पारंपररक सणर्जमकल या एं िोर्वैस्कु लर उपचार संभर्व नही ंथा। णर्वशेष रूप से, ददमसेतेर्जी सेराहत णमलना उत्साहर्जनक हैऔर यह र्जणटल र्वैस्कु लर मामलोंमेंउन्नत उपचार पद्धणतयोंकी भूणमका को रेखांणकत करता है।”

अपनी राहत व्यक्त करतेहए आशीर्ष मुखजी (नाम परिवणतवत) नेकहा, “र्जब मुझेबताया गया णक अब कोई सर्जमरी संभर्व नही ंहैऔर अंग काटना पड़ सकता है, तो मैंबहत णनराश हो गया था। स्टेम सेल थेरेपी नेमुझेएक नया णर्वकल्प और नई उम्मीद दी। णसफम एक णदन के भीतर मेरा ददमकाफी कम हो गया। इस उपचार केणलए मैंमणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉिर्वेकी पूरी णचणकत्सा टीम का णदल सेआभार व्यक्त करता हं।”

Tags:    

Similar News