भुट्टे के चमकदार दाने आपके पेट के लिए बन सकते हैं खतरा, ये संकेत करेंगे पहचानने में मदद

चमकदार भुट्टे के दाने पेट में समस्याएं पैदा कर सकते हैं, और कुछ संकेत इसे पहचानने में मदद करते हैं।

Update: 2026-03-11 11:00 GMT

नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में भुट्टे (कॉर्न) बच्चों से लेकर बड़े सभी को पसंद आते हैं। लेकिन आजकल बाजार में भुट्टों को ज्यादा आकर्षक दिखाने और लंबे समय तक ताजा बनाए रखने के लिए कई तरह के केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स का उपयोग किया जाता है। ऐसे भुट्टे न केवल स्वाद में बदलाव लाते हैं, बल्कि पेट दर्द, एलर्जी और कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं। इसलिए भुट्टे खरीदते समय उनकी पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है।

भुट्टे की पहचान का पहला तरीका है उसके दानों का रंग और चमक देखना। प्राकृतिक भुट्टे के दाने हल्के पीले रंग के और मैट फिनिश वाले होते हैं। यदि दाने असामान्य रूप से बहुत चमकदार या बिल्कुल समान दिखाई दें, तो यह चेतावनी हो सकती है कि उन्हें लंबे समय तक ताजा बनाए रखने के लिए किसी तरह के रसायन या प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया गया है।

भुट्टे की खुशबू भी सुरक्षा का संकेत देती है। ताजगी और प्राकृतिकता का अंदाज हल्की मिट्टी जैसी खुशबू से लगाया जा सकता है। यदि भुट्टे में तेज या रासायनिक जैसी गंध महसूस होती है, तो इसे खरीदने से बचना चाहिए। कभी-कभी रसायन से हल्की बदबू आती है, जो प्राकृतिक भुट्टों में नहीं होती।

भुट्टे की पत्तियों की स्थिति भी उसकी ताजगी और सुरक्षा के बारे में जानकारी देती है। असली और ताजे भुट्टे की हरी पत्तियां हल्की पीली या सूखी हो सकती हैं और उनमें थोड़ी प्राकृतिक झुर्रियां भी होती हैं। वहीं, यदि पत्तियां पूरी तरह चमकदार और समान दिखें, तो यह संकेत हो सकता है कि भुट्टे को स्टोर करने या आकर्षक दिखाने के लिए रसायन का इस्तेमाल किया गया है।

दानों की बनावट पर भी ध्यान देना जरूरी है। ताजा भुट्टे के दाने हल्के, मुलायम और दूधिया रस से भरे होते हैं। यदि दाने बहुत सख्त या असामान्य रूप से कठोर हों, तो यह पुराने भुट्टे या रसायन से उपचारित भुट्टे का संकेत हो सकता है। ऐसे भुट्टे स्वाद में फीके होते हैं और पाचन के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए खरीदते समय दानों को हल्का दबाकर जांचना चाहिए।

भुट्टे खरीदते समय इन संकेतों पर ध्यान देने से न केवल ताजगी का पता चलता है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाव भी किया जा सकता है। (With inputs from IANS)

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