बवासीर के लिए काल है कचनार के पेड़ की जड़, जान लें प्रयोग का सही तरीका
बवासीर के इलाज में कचनार की जड़ प्रभावी मानी जाती है और इसे सही तरीके से इस्तेमाल करने पर राहत मिलती है।
नई दिल्ली: आज की आधुनिक जीवनशैली में लोग लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठकर काम करते हैं, जिससे शारीरिक गतिविधि कम हो गई है। कम गतिविधि के कारण युवाओं और बुजुर्गों दोनों में बवासीर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं, लेकिन कई बार ऑपरेशन के बाद समस्या दोबारा उभर सकती है।
ऑपरेशन के बाद समस्या क्यों लौटती है?
लोग मानते हैं कि ऑपरेशन के बाद बवासीर के मस्से फिर नहीं आते, लेकिन यह सही नहीं है। ऑपरेशन के दौरान सिर्फ मस्सों की ऊपरी सतह हटाई जाती है, जड़ तक नहीं। इसलिए समस्या की जड़ पर काम करना जरूरी है।
आयुर्वेद में कचनार का महत्व
आयुर्वेद में कचनार (Bauhinia variegata) की जड़ को बवासीर के इलाज में अत्यंत प्रभावी माना गया है। कचनार की जड़ पुराने मस्सों को भी ठीक करने की क्षमता रखती है और दोबारा होने की संभावना कम करती है।
कचनार की जड़ का प्रयोग
- पाउडर के रूप में: पुराने कचनार के पेड़ की जड़ को सुखाकर पाउडर बनाएं और प्रयोग करें। माना जाता है कि पेड़ जितना पुराना, उसकी जड़ में उतने अधिक औषधीय गुण होते हैं।
- लेप के रूप में: कचनार की सूखी जड़ का पाउडर हल्दी और नारियल के तेल में मिलाकर प्रभावित हिस्से पर लगाया जा सकता है। यह धीरे-धीरे मस्सों को सूखने और गायब होने में मदद करता है।
- ध्यान दें: किसी भी प्रयोग से पहले चिकित्सक से सलाह लेना अनिवार्य है।
कचनार के अन्य औषधीय उपयोग
- कचनार के फूल: डायबिटीज नियंत्रण में सहायक।
- कचनार की छाल: अन्य रोगों में उपयोगी।
- कचनार के फूल का पाउडर बाजार में आसानी से उपलब्ध है। (With inputs from IANS)