मालदा रेलवे अस्पताल में विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026, “कलंक ही असली चुनौती”

मालदा में डिविजनल रेलवे अस्पताल ने शनिवार को विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026 मनाया।

Update: 2026-02-03 10:30 GMT

मालदा स्थित डिविजनल रेलवे अस्पताल में शनिवार को विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2026 के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन डीआरएम मालदा मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया। इस वर्ष की वैश्विक थीम “कुष्ठ रोग ठीक हो सकता है, असली चुनौती कलंक है” रही, जिसके अनुरूप कार्यक्रम का मुख्य फोकस बीमारी से जुड़ी गलत धारणाओं और सामाजिक भेदभाव को दूर करना था।

कार्यक्रम का उद्देश्य कुष्ठ रोग (हैंसेन रोग) के प्रति लोगों में सही जानकारी फैलाना, इसकी शुरुआती पहचान और समय पर इलाज के महत्व को समझाना और इससे जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने के लिए संवाद को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) आर. एन. भट्टाचार्य, विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, आरजी कर मेडिकल कॉलेज, कोलकाता उपस्थित रहे। उन्होंने कुष्ठ रोग से जुड़े चिकित्सकीय और सामाजिक पहलुओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

डॉ. भट्टाचार्य ने बताया कि वे पिछले 22 वर्षों से कुष्ठ रोग से प्रभावित मरीजों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अभी भी कुष्ठ रोग के मामलों के लिहाज से प्रमुख देशों में शामिल है और पश्चिम बंगाल रिपोर्ट किए गए मामलों में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है और इसके इलाज के लिए बहु-औषधि चिकित्सा (एमडीटी) सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के तहत निःशुल्क उपलब्ध है।

हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि बीमारी की देर से पहचान होने पर शारीरिक विकृतियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे मरीजों को सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि समय पर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और संरचित फिजियोथेरेपी के माध्यम से मरीजों की खोई हुई कार्यक्षमता को काफी हद तक बहाल किया जा सकता है, जिससे वे फिर से समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ जीवन जी सकें। डॉ. भट्टाचार्य ने महात्मा गांधी द्वारा कुष्ठ रोगियों के सम्मान और पुनर्वास के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

कार्यक्रम के दौरान एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसका संचालन डॉ. अमिताभ मंडल, डिप्टी सीएमओएच-III, मालदा ने किया। इस सत्र में डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य प्रतिभागियों के साथ कुष्ठ रोग की शुरुआती पहचान, उपचार, संक्रमण की रोकथाम और समुदाय-आधारित सहयोग पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने सवाल-जवाब के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान भी किया।

इस आयोजन में अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों—डॉ. एस. बोस (एसीएमएस/पी), डॉ. एस. रॉय (डीएमओ/ईएनटी), डॉ. एस. भट्टाचार्य (एसीएमएस)—सहित नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी सहभागिता ने यह संदेश दिया कि कुष्ठ रोग से लड़ाई केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है।

With Inputs From IANS

Tags:    

Similar News