दिल्ली की 30% आबादी को चश्मे की जरूरत, AIIMS की रिपोर्ट में खुलासा, जानें क्यों बढ़ रही है आंखों की समस्याएं

दिल्ली के लगभग 30 प्रतिशत निवासियों को नजदीक या दूर की दृष्टि दोष (Refractive Error) के कारण चश्मे की जरूरत है.

Update: 2026-03-10 05:30 GMT

देश की राजधानी दिल्ली में आंखों के स्वास्थ्य को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है.AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र (RP Centre) द्वारा किए गए एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली के लगभग 30 प्रतिशत निवासियों को नजदीक या दूर की दृष्टि दोष (Refractive Error) के कारण चश्मे की जरूरत है. AIIMS ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 'रिफ्रैक्टिव एरर सिचुएशन एनालिसिस टूल' (RESAT) के माध्यम से यह डेटा जुटाया है.

दिल्ली की लगभग 29.5% आबादी, यानी करीब 60 लाख लोग, रिफ्रैक्टिव एरर या प्रेसबायोपिया (उम्र के साथ नजदीक की नजर कमजोर होना) से प्रभावित हैं. 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में यह समस्या सबसे अधिक देखी गई है. स्कूली बच्चों में 'मायोपिया' (निकट दृष्टि दोष) मुख्य समस्या बनी हुई है, जो लगभग 13.1% बच्चों को प्रभावित कर रही है.

स्वास्थ्य सेवाओं में जेंडर गैप और चुनौतियां

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दूर की दृष्टि के लिए इलाज की पहुंच 59.8% और नजदीक की दृष्टि के लिए केवल 47.1% रही. डॉ. प्रवीण वशिष्ठ (प्रोफेसर, कम्युनिटी ऑप्थल्मोलॉजी, AIIMS) ने बताया कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में आंखों के इलाज की पहुंच काफी कम है, जो एक गंभीर लैंगिक असमानता को दर्शाता है.

संसाधनों की स्थिति: डॉक्टरों की संख्या और विजन सेंटर

दिल्ली में आंखों की देखभाल के लिए कुल 249 संस्थान हैं, जिनमें से 77.5% प्राइवेट क्षेत्र द्वारा संचालित हैं. दिल्ली में प्रति 18,430 लोगों पर एक नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) उपलब्ध है. डॉ. वशिष्ठ के अनुसार, नेत्र रोग विशेषज्ञों की संख्या पर्याप्त है, लेकिन ऑप्थल्मिक तकनीशियनों की भारी कमी है, जो चश्मा बनाने और विजन टेस्टिंग के लिए अनिवार्य हैं. सार्वजनिक क्षेत्र में केवल 50 फंक्शनल 'विजन सेंटर' हैं, जो प्राथमिक स्तर पर आंखों की देखभाल के लिए नाकाफी हैं.

आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं का अहम योगदान

हाल ही में पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में एक विशेष शिविर लगाया गया, जहां आशा कार्यकर्ताओं को दृष्टि दोष पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया। मात्र 15 दिनों में इन कार्यकर्ताओं ने 2,000 घरों का दौरा किया और 7,000 लोगों की आंखों की जांच की.

सरकार की प्रतिबद्धता

रिपोर्ट में कहा गया है कि आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के माध्यम से दिल्ली में आंखों की देखभाल के लिए वित्तीय और राजनीतिक प्रतिबद्धता मजबूत है. सरकारी क्लीनिक, मोबाइल कैंप और टर्शियरी केयर अस्पतालों के जरिए इस संकट से निपटने के प्रयास जारी हैं.

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