पाकिस्तान में 2026 का पहला पोलियो केस मिला, सिंध में चार साल का बच्चा संक्रमित
पाकिस्तान में 2026 का पहला पोलियो मामला सामने आया है, जहां सिंध प्रांत में चार साल का बच्चा संक्रमित पाया गया।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में वर्ष 2026 का पहला पोलियो मामला सामने आया है। यह मामला सिंध प्रांत के सुजावल जिले की बेल्लो यूनियन काउंसिल में रहने वाले चार वर्षीय बच्चे में पाया गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह इस साल दर्ज किया गया पहला वाइल्ड पोलियो वायरस का मामला है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संक्रमण की पुष्टि पाकिस्तान के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े पाकिस्तान नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (एनईओसी) ने की है। साथ ही, इस्लामाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रीजनल रेफरेंस लैब ने भी इस मामले की पुष्टि की है।
दुनिया में पाकिस्तान और अफगानिस्तान ऐसे दो देश हैं जहां अब भी वाइल्ड पोलियो वायरस एंडेमिक बना हुआ है। पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन अभियान को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में पोलियो कार्यकर्ताओं पर हमलों की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, जिससे टीकाकरण अभियान प्रभावित होता रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में पाकिस्तान में चलाए गए पहले पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान लगभग 10 लाख बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकी। इनमें से करीब 53 हजार बच्चों के परिवारों ने पोलियो ड्रॉप्स देने से मना कर दिया। पोलियो वैक्सीन लेने से इनकार करने के मामलों में कराची शहर सबसे आगे रहा, जहां कुल अस्वीकृतियों का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया।
हालांकि, पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत 44.3 मिलियन से अधिक बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलाई गईं। अधिकारियों के अनुसार, घर-घर जाकर किए गए इस अभियान में लगभग 98 प्रतिशत बच्चों तक पहुंच बनाई गई, जबकि करीब 2 प्रतिशत बच्चे टीकाकरण से छूट गए। फिर भी, पाकिस्तान की बड़ी आबादी को देखते हुए यह संख्या काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, कुल मिलाकर इस अभियान के दौरान लगभग 0.95 मिलियन बच्चे वैक्सीनेशन से छूट गए। इनमें से लगभग 0.67 मिलियन बच्चे इसलिए टीकाकरण से वंचित रह गए क्योंकि अभियान के समय वे अपने घरों पर मौजूद नहीं थे। हालांकि, अभियान के दौरान लगभग 2.5 मिलियन “मेहमान बच्चों” को पोलियो ड्रॉप्स दी गईं, जिनमें संभवतः ऐसे बच्चे भी शामिल थे जो पहले टीकाकरण से छूट गए थे।
एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा समस्याओं, कुछ समुदायों द्वारा बहिष्कार और दुर्गम बर्फीले इलाकों के कारण लगभग 2,33,000 बच्चों तक पहुंचना संभव नहीं हो सका। इनमें से लगभग 1,84,000 बच्चे खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के थे, जबकि करीब 50,000 बच्चे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान के दुर्गम इलाकों में रहने के कारण टीकाकरण से वंचित रह गए।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बलूचिस्तान के मस्तुंग, ग्वादर, चागाई और अवरान जिलों में सुरक्षा कारणों से पोलियो उन्मूलन अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। वहीं कुल लक्षित बच्चों में से लगभग 0.14 प्रतिशत ने टीका लेने से इनकार किया, जिनमें कराची में करीब 31 हजार मामलों के साथ सबसे अधिक अस्वीकृतियां दर्ज की गईं।
प्रांतीय आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 22.9 मिलियन से अधिक बच्चों को पोलियो वैक्सीन दी गई, जबकि सिंध में 10.5 मिलियन, खैबर पख्तूनख्वा में 7.13 मिलियन और बलूचिस्तान में 2.3 मिलियन से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया गया।
इसके अलावा, इस्लामाबाद में 4.55 लाख से अधिक बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स दी गईं, जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान में लगभग 2.61 लाख और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में 6.73 लाख से अधिक बच्चों को टीकाकरण के दायरे में लाया गया। (With inputs from IANS)