हरियाणा में कैंसर के खिलाफ महाजंग: 28 फरवरी से शुरू होगा HPV टीकाकरण अभियान, मिलीं 1.14 लाख वैक्सीन डोज

हरियाणा एनएचएम (NHM) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार, प्रत्येक जिले को शुरुआती तौर पर 2,000 वैक्सीन भेजी गई हैं.

Update: 2026-02-26 06:30 GMT

हरियाणा सरकार ने सर्वाइकल कैंसर को मात देने के लिए अपनी कमर कस ली है. 28 फरवरी को होने वाले नेशनल रोलआउट से पहले प्रदेश को 1.14 लाख HPV वैक्सीन की डोज मिल चुकी हैं. यह अभियान मुख्य रूप से उन किशोरियों को लक्षित करेगा जिनकी उम्र 14 वर्ष हो चुकी है. हरियाणा एनएचएम (NHM) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार, प्रत्येक जिले को शुरुआती तौर पर 2,000 वैक्सीन भेजी गई हैं. इस साल प्रदेश में कुल 3 लाख लड़कियों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है.

यह अभियान पहले जिला अस्पतालों से शुरू होगा, जिसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) तक विस्तारित किया जाएगा. नेशनल लॉन्च के बाद जिला स्तर पर उद्घाटन होगा, जहाँ कम से कम 50 लड़कियों को टीका लगाया जाएगा.

टीकाकरण की प्रक्रिया और सुरक्षा मानक

अभियान में गार्डासिल (Gardasil) वैक्सीन का उपयोग किया जाएगा. यह बाएं हाथ के ऊपरी हिस्से में 0.5 मिली की एकमात्र खुराक के रूप में दी जाएगी. सभी टीकाकरण का रिकॉर्ड U-WIN पोर्टल पर दर्ज होगा. ओटीपी (OTP) आधारित डिजिटल सहमति या लिखित सहमति के बाद ही टीका लगाया जाएगा.टीका लगाने के बाद हर लाभार्थी को कम से कम 30 मिनट तक चिकित्सा अधिकारियों की देखरेख में रखा जाएगा.दोहराव से बचने के लिए लाभार्थी की बाईं तर्जनी उंगली (Index Finger) पर स्याही का निशान लगाया जाएगा.

विशेषज्ञों की राय: क्यों जरूरी है यह टीका?

नारायणा अस्पताल, गुरुग्राम के ऑन्कोलॉजी निदेशक डॉ. रणदीप सिंह कहते हैं, "यह वैक्सीन तब सबसे अच्छा काम करती है जब इसे वायरस के संपर्क में आने से पहले दिया जाए. 14 साल की उम्र में यह 'इम्युनिटी की दीवार' खड़ी करती है. यह न केवल कैंसर के मामलों को कम करेगी, बल्कि आने वाले दो दशकों में स्वास्थ्य देखभाल के बोझ को भी घटाएगी."

तैयारियों का सख्त चेकलिस्ट

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, केवल उन्हीं केंद्रों पर टीकाकरण होगा जहाँ मेडिकल ऑफिसर तैनात हैं. कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे डीप फ्रीजर और कोल्ड बॉक्स) की कार्यक्षमता की पुष्टि पहले ही कर ली गई है. सरकार का लक्ष्य वैक्सीन की बर्बादी को 1% से कम रखने का है.

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