गुजरात सरकार के ‘भागीरथ अभियान’ से टीबी के खिलाफ मिसाल बना गिर सोमनाथ
गिर सोमनाथ ने गुजरात सरकार के ‘भागीरथ अभियान’ के जरिए टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है।
गिर सोमनाथ: ‘स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए देशभर में टीबी उन्मूलन अभियान को तेज किया गया है। गुजरात का गिर सोमनाथ जिला इस दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है। केंद्र सरकार के सहयोग और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार यहां ‘भागीरथ अभियान’ के माध्यम से टीबी के खिलाफ व्यापक मुहिम चला रही है।
अभियान के तहत हेल्थ वर्कर, आशा कार्यकर्ता और पैरा-मेडिकल स्टाफ की टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच कर रही हैं, ताकि संभावित मरीजों की समय रहते पहचान की जा सके।
लाभार्थी अश्विन भाई झाला ने बताया कि ‘स्वास्थ्य सहाय योजना’ के तहत मरीज इलाज का बिल प्रस्तुत कर आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्तर पर भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है और सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार में सहयोग कर सकते हैं।
एक अन्य लाभार्थी जगु भाई मोरी ने योजना की सराहना करते हुए कहा कि इससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंच रहा है और इसके लिए सरकार का आभार व्यक्त किया।
जिले में इन दिनों एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी पहुंच शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण और वन क्षेत्रों तक भी सुनिश्चित की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर कई एनजीओ, उद्योगपति, समाजसेवी और निजी अस्पताल भी इस मुहिम से जुड़कर ‘निक्षय मित्र’ के रूप में टीबी मरीजों की मदद कर रहे हैं। मरीजों को सरकारी सहायता के साथ अतिरिक्त पोषण किट भी प्रदान की जा रही है।
निक्षय मित्र मंडल भाई रावलिया ने बताया कि दवा के साथ पोषण किट मिलने से मरीजों को काफी राहत मिली है और जरूरतमंद लोगों को सीधा लाभ पहुंच रहा है।
जिला टीबी अधिकारी डॉ. शीतल राम ने बताया कि जिला कलेक्टर के माध्यम से फंड तालुका स्तर तक उपलब्ध कराया जा रहा है और अभियान के तहत जांच पूरी तरह नि:शुल्क की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले जिले में टीबी जांच के लिए दो मशीनें थीं, लेकिन अब छह नई मशीनें स्थापित की गई हैं। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन और जिला प्रशासन के सहयोग से इन मशीनों को प्रत्येक तालुका स्तर पर उपलब्ध कराया गया है। प्रत्येक जांच की लागत लगभग 1,500 रुपये है, जिसे सरकार वहन कर रही है।
‘टीबी हारेगा, भारत जीतेगा’ के संकल्प की दिशा में गिर सोमनाथ की यह पहल दर्शाती है कि मजबूत नेतृत्व, सुदृढ़ स्वास्थ्य तंत्र और सामाजिक सहयोग से किसी भी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। (With inputs from IANS)