TB Vaccine Update: भारत में टीबी के दो नए टीकों का ट्रायल पूरा; सुरक्षा में पास लेकिन सभी संक्रमणों पर बेअसर? जानें एक्सपर्ट्स की राय
भारत में तपेदिक (TB) के खिलाफ जंग में एक नई उम्मीद जगी है. दो नए टिकों का ट्रायल पूरा हो गया है.
भारत में तपेदिक (TB) के खिलाफ जंग में एक नई उम्मीद जगी है, हालांकि हाल में हुए एक रिसर्च में नतीजे मिले-जुले रहे हैं. 'द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल' (BMJ) में प्रकाशित फेज-3 ट्रायल के परिणामों के अनुसार, दो नए टीके VPM1002 और Immuvac सुरक्षा के मामले में तो खरे उतरे हैं, लेकिन वे संक्रमण के सभी रूपों से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाए हैं. भारत में शिशुओं को जन्म के समय BCG का टीका लगाया जाता है, जो बच्चों में गंभीर टीबी से तो बचाता है, लेकिन वयस्कों और किशोरों के लिए यह पर्याप्त प्रभावी नहीं है. इसी कमी को दूर करने के लिए ICMR और अन्य संस्थानों ने VPM1002 और Immuvac नाम के दो नए टीकों का परीक्षण किया है.
क्या रहे ट्रायल के नतीजे?
जुलाई 2019 से दिसंबर 2020 के बीच दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित छह राज्यों के 12,700 से अधिक लोगों पर यह स्टडी किया गया. ये सभी लोग टीबी के मरीजों के करीबी संपर्क (Household contacts) में थे. स्टडी में पाया गया कि दोनों टीके पूरी तरह सुरक्षित हैं और शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune response) पैदा करते हैं. रिसर्चर ने साफ किया कि ये टीके सभी प्रकार के टीबी (विशेषकर फेफड़ों की टीबी या पल्मोनरी टीबी) को रोकने में उतने प्रभावी नहीं रहे जितनी उम्मीद थी.
VPM1002 और Immuvac की खासियत
VPM1002:-यह एक रीकॉम्बिनेंट बीसीजी (rBCG) टीका है जिसे सीरम लाइफ साइंस द्वारा विकसित किया गया है. यह फेफड़ों के बाहर होने वाली टीबी (Extrapulmonary TB) के खिलाफ 50.4% प्रभावी पाया गया है.
mmuvac:-यह एक 'इनएक्टिवेटेड' (Inactivated) टीका है जिसे ICMR और कैडिला फार्मास्यूटिकल्स ने बनाया है। यह 6 से 10 साल के बच्चों में एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के खिलाफ सुरक्षा देता है.
पोषण की भूमिका: एक अहम खोज
इस रिसर्च का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जिन बच्चों या वयस्कों का वजन कम (Underweight) था, उन पर इन टीकों ने काम नहीं किया. रिसर्चस का मानना है कि टीबी के खिलाफ टीकाकरण तभी सफल होगा जब उसे सही पोषण और खान-पान (Nutritional Support) के साथ जोड़ा जाएगा.