चक्रासन योग से कमर दर्द और रीढ़ की जकड़न से पाएं राहत

चक्रासन योगासन रीढ़ को लचीला बनाकर कमर दर्द और जकड़न को कम करने में मदद करता है।

Update: 2026-04-09 06:45 GMT

नई दिल्ली: आज की आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे कमर दर्द, उठने-बैठने में परेशानी और मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ने लगता है। कई लोग घरेलू उपायों या थेरेपी का सहारा लेते हैं, लेकिन इससे समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाती।

इन्हीं में से एक लोकप्रिय आसन है चक्रासन, जिसे व्हील पोज भी कहा जाता है और यह 'अष्टांग योग' की प्राइमरी सीरीज का ही एक हिस्सा है। इस योगासन को करने के लिए शरीर को पीछे की ओर झुकाया जाता है और शरीर एक पहिए का रूप धारण कर लेता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, चक्रासन (व्हील पोज) एक उन्नत योगासन है, जो रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है और हृदय व फेफड़ों के लिए अत्यधिक लाभकारी है। यह आसन नसों, पाचन, श्वसन और अंतःस्रावी तंत्र को मजबूत करता है, तनाव कम करता है और संपूर्ण शरीर की मांसपेशियों को टोन करता है।

चक्रासन रीढ़ को लचीला बनाता है और कमर दर्द से राहत दिलाता है। यह आंखों की मांसपेशियों को मजबूत कर रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। यह मानसिक तनाव और चिंता को कम कर शांति देने में भी मददगार है। यह मांसपेशियों को मजबूत कर शरीर की सक्रियता बढ़ाता है।

इसके नियमित अभ्यास से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। हालांकि, शुरुआत में करने से थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अभ्यासकर्ता आसन को करने के लिए दीवार का सहारा ले सकते हैं।

चक्रासन न सिर्फ रीढ़ की मज़बूती बढ़ाता है, बल्कि पूरे शरीर को ऊर्जावान बनाता है। रोजाना 5-10 मिनट का अभ्यास कमर दर्द को काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है। अगर कोई भी अभ्यासकर्ता बैठे रहने की वजह से जकड़न महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी दिनचर्या में चक्रासन शामिल करें।

अगर पीठ, कलाई या गर्दन में गंभीर दर्द है, तो डॉक्टर या योग गुरु की सलाह लें। गर्भवती महिलाएं या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग बिना मार्गदर्शन के न करें। (With inputs from IANS)

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