कमर दर्द से राहत और बेहतर पाचन के लिए रोज करें उत्थित पार्श्वकोणासन
उत्थित पार्श्वकोणासन रोज करने से कमर दर्द कम होता है और पाचन बेहतर होता है।
नई दिल्ली: रोजाना योगाभ्यास स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि अधिकांश लोग सामान्य योगासनों के बारे में जानते हैं, लेकिन उत्थित पार्श्वकोणासन के फायदे और सही अभ्यास के बारे में कई लोग कम जानते हैं। यह योगासन शरीर के साइड हिस्से को खोलने और लचीलापन बढ़ाने में मदद करता है।
संस्कृत शब्द ‘उत्थित पार्श्वकोणासन’ का अर्थ है विस्तारित पार्श्व कोण मुद्रा। यह एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है, जो शरीर के दोनों साइड हिस्सों में गहरा खिंचाव लाता है और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, इसका नियमित अभ्यास कमर दर्द में राहत देता है, पाचन में सुधार लाता है और शरीर की संरचना को मजबूत बनाता है। रोजाना 30-60 सेकंड तक इस आसन का अभ्यास जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
इस आसन को करना आसान है, लेकिन शुरुआती लोगों को थोड़ा अभ्यास करना पड़ सकता है। सबसे पहले योगा मैट पर दोनों पैरों को एक-दूसरे से दूर फैलाएँ। इसके बाद दाहिने पैर को बाहर की ओर मोड़कर धीरे-धीरे नीचे बैठें। दाहिने हाथ को पैर के पास जमीन पर रखें और बाएं हाथ को ऊपर की ओर 90 डिग्री के एंगल में उठाएँ। कुछ समय इसी स्थिति में रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्थित पार्श्वकोणासन पेट के अंगों की मालिश करता है, जिससे पाचन बेहतर होता है। यह आसन पैरों और रीढ़ को मजबूत बनाता है, शरीर में लचीलापन बढ़ाता है और रीढ़ पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी यह लाभकारी है क्योंकि इसे करने से मन को शांति मिलती है और तनाव कम होता है।
हालांकि, इसे नियमित रूप से करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। शुरुआत में इसे किसी योग विशेषज्ञ की निगरानी में करना बेहतर होता है। यदि किसी व्यक्ति को हाल ही में चोट लगी हो, सर्जरी हुई हो या माइग्रेन जैसी समस्या हो, तो इस आसन को करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है। सही तरीके और संतुलित आहार के साथ रोजाना अभ्यास से शरीर और मन दोनों को संतुलन और ताकत मिलती है। (With inputs from IANS)