डेस्क जॉब वालों के लिए वरदान है 'ऊर्ध्व मुख श्वानासन', पीठ दर्द से मिलेगा छुटकारा

ऊर्ध्व मुख श्वानासन पीठ दर्द से राहत देकर शरीर को लचीला और सक्रिय बनाता है।

Update: 2026-03-10 07:45 GMT

नई दिल्ली: योग में कई ऐसे आसन बताए गए हैं जो शरीर को ताकत देने के साथ-साथ उसे लचीला और संतुलित बनाने में भी मदद करते हैं। इन्हीं प्रभावशाली योगासनों में से एक है ‘ऊर्ध्व मुख श्वानासन’। इस आसन का नियमित अभ्यास शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति बढ़ाने के साथ मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक माना जाता है।

‘ऊर्ध्व मुख श्वानासन’ संस्कृत का शब्द है, जिसे सामान्य भाषा में ‘अपवर्ड फेसिंग डॉग पोज’ कहा जाता है। यह आसन शरीर के सामने के हिस्से को गहराई से स्ट्रेच करता है और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे करने से छाती और फेफड़ों का विस्तार होता है, जिससे सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है। साथ ही, यह पीठ, कंधों और भुजाओं की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी मदद करता है।

यह आसन सूर्य नमस्कार का भी एक अहम हिस्सा है। आमतौर पर इसे सूर्य नमस्कार के सातवें चरण में किया जाता है, जो अष्टांग नमस्कार के बाद आता है। कई लोग इसे भुजंगासन के स्थान पर या उसके बाद भी करते हैं। इस आसन के दौरान शरीर का ऊपरी हिस्सा ऊपर की ओर उठता है, जिससे रीढ़ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और शरीर का पोस्चर बेहतर बनने में मदद मिलती है।

आयुष मंत्रालय ने भी इस आसन के महत्व को रेखांकित किया है। मंत्रालय के अनुसार, ऊर्ध्व मुख श्वानासन रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर की थकान कम होती है और रीढ़, कंधों तथा भुजाओं की ताकत बढ़ती है। इसके अलावा यह आसन पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है और दमा जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं में भी कुछ हद तक राहत दे सकता है।

लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है। लगातार बैठने से पीठ और कंधों में जकड़न की समस्या हो सकती है, जिसे दूर करने में यह योगासन मदद करता है। इसके अभ्यास से पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और कंधों में लचीलापन आता है।

शारीरिक लाभों के साथ-साथ यह आसन मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। सुबह खाली पेट इसका अभ्यास करने से शरीर तरोताजा महसूस करता है और पूरे दिन ऊर्जा बनी रहती है।

हालांकि, जिन लोगों को घुटनों, कूल्हों या कमर में पुरानी चोट या दर्द की समस्या है, उन्हें इस आसन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या किसी योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। वहीं गर्भवती महिलाओं को इसे केवल संशोधित तरीके से और विशेषज्ञ की निगरानी में ही करना चाहिए। (With inputs from IANS)

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