कैंसर आज भी सबसे अधिक चर्चा में रहने वाली बीमारियों में से एक है, फिर भी इससे जुड़ी गलत जानकारियाँ आज भी व्यापक रूप से फैली हुई हैं। चिकित्सा विज्ञान में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद, मिथक अक्सर तथ्यों से, तेज़ी से फैलते हैं, जिससे अनावश्यक डर और भ्रम पैदा होता है। वर्ष 2026 में भी कई भ्रांतियाँ लोगों की सोच पर हावी हैं। इस विश्व कैंसर दिवस पर यह हम सबकी ज़िम्मेदारी बनती है की हम सामान्य मिथकों के बारे में बात करें :
1. कैंसर हमेशा जानलेवा होता है
अब भी कई लोग मानते हैं कि कैंसर का मतलब जीवन का अंत है। जबकि वास्तविकता यह है कि समय पर पहचान, इम्यूनोथेरेपी, टार्गेटेड ट्रीटमेंट और प्रिसीजन (Precision) मेडिसिन के कारण सर्वाइवल रेट में काफी सुधार हुआ है। उदाहरण के तौर पर, शुरुआती चरण के स्तन कैंसर में पाँच साल की सर्वाइवल रेट लगभग 99% है। कैंसर मौत की सज़ा नहीं है।
2. चीनी सीधे कैंसर को बढ़ाती है
यह सच है कि कैंसर कोशिकाएँ ग्लूकोज़ का अधिक उपयोग करती हैं, लेकिन आहार से पूरी तरह चीनी हटाने से ट्यूमर खत्म नहीं होता है। शरीर बिना चीनी के भी ग्लूकोज़ बनाता है। हाँ, अधिक चीनी मोटापा और इन्फ्लेमेशन (सूजन) बढ़ा सकती है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
3. बायोप्सी से कैंसर फैलता है
यह मिथक मरीजों को ज़रूरी जाँच से दूर रखता है। बायोप्सी से कैंसर नहीं फैलता। बल्कि यह कैंसर के प्रकार और स्टेज की सही पहचान के लिए एक अहम प्रक्रिया है, जिससे सही इलाज तय किया जा सकता है। शोध बताते हैं कि बायोप्सी कराने वाले मरीजों में बेहतर सर्वाइवल देखा गया है।
4. परिवार में कैंसर हो तो आपको भी होगा ही
परिवार में किसी को कैंसर होना यह तय नहीं करता कि आपको भी कैंसर होगा। केवल 5–10% कैंसर आनुवंशिक होते हैं। अधिकांश कैंसर जीवनशैली, पर्यावरणीय कारणों या जीन में होने वाले आकस्मिक बदलावों के कारण होते हैं। कुछ मामलों में जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन रोकथाम और नियमित जांच कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
5. मोबाइल फोन से ब्रेन ट्यूमर होता है
मोबाइल फोन नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन छोड़ते हैं, जो डी.एन.ए को नुकसान पहुँचाने में सक्षम नहीं होते। एक्स-रे या अल्ट्रावायलेट किरणों के विपरीत, यह रेडिएशन कैंसर का कारण नहीं बनता। दशकों की रिसर्च में मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच कोई ठोस संबंध नहीं पाया गया है।
6. कैंसर संक्रामक होता है
कैंसर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। हालाँकि कुछ संक्रमण, कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। जैसे, HPV से सर्वाइकल कैंसर और हेपेटाइटिस B or C से लिवर कैंसर का खतरा बढ़ता है। टीकाकरण, सुरक्षित व्यवहार और नियमित जांच से ऐसे कैंसरों को रोका जा सकता है।
7. हर्बल उपचार कैंसर ठीक कर देते हैं
अब तक किसी भी हर्बल इलाज को वैज्ञानिक रूप से कैंसर का इलाज साबित नहीं किया गया है। बिना प्रमाण वाले उपायों पर निर्भर रहना ज़रूरी इलाज में देरी कर सकता है और स्थिति बिगड़ सकती है। प्रमाण-आधारित चिकित्सा ही सुरक्षित और प्रभावी रास्ता है।
8. कीमोथेरेपी के हमेशा गंभीर साइड इफेक्ट होते हैं
आधुनिक चिकित्सा के साथ कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव काफी कम हो गए हैं। मतली जैसी समस्याएँ अब कम देखने को मिलती हैं। इलाज को इस तरह नियंत्रित किया जाता है कि इम्यून सिस्टम पर असर कम पड़े। आज कई मरीज इसे पहले की तुलना में बेहतर सहन कर पाते हैं।
9. डियोड्रेंट और प्लास्टिक कैंसर का कारण बनते हैं
डियोड्रेंट में एल्यूमिनियम या प्लास्टिक में BPA (बिस्फेनॉल ए) को लेकर चिंताएँ बनी रहती हैं, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों और नियामक संस्थाओं को कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। सामान्य उपयोग सुरक्षित माना जाता है। BPA-फ्री उत्पाद चुनना एक सावधानी हो सकती है, ज़रूरत नहीं।
10. सकारात्मक सोच से ही कैंसर ठीक हो जाता है
सकारात्मक सोच सीधे तौर पर कैंसर के जोखिम या इलाज के नतीजों को तय नहीं करती। हालाँकि अच्छा मानसिक दृष्टिकोण मरीजों को बेहतर ढंग से सामना करने में मदद करता है, लेकिन इलाज का आधार समय पर पहचान और प्रमाण-आधारित चिकित्सा ही होता है।
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