टीनएजर्स में सर्वाइकल कैंसर का खतरा, गायनेकोलॉजिस्ट ने बताया सेहत की सुरक्षा के लिए जरूरी बदलाव
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर आम होते जा रहा है, ऐसे में डॉक्टर कुछ जरूरी उपायों को करने का सलाह देते हैं.
आमतौर पर किशोरों में गर्भाशय ग्रीवा (सिक्स) के कैंसर का खतरा बहुत कम होता है. फिर भी, वे ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) की चपेट में आ सकते हैं, जो बाद के जीवन में इस कैंसर का मुख्य कारण बनता है. भारत में सर्वाइकल कैंसर सबसे ज्यादा कॉमन देखा जा रहा है. इसके बारे में सही जानकारी होने से युवा समय रहते वैक्सीन और सुरक्षित आदतों जैसे कदम उठा सकते हैं.
अपोलो क्रैडल की विशेषज्ञ डॉ. सौम्या राघवन बताती हैं कि यह वायरस इतना सामान्य है कि जीवन में कभी न कभी अधिकांश लोग इसके संपर्क में आते ही हैं. भारत में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है. इसलिए इसके लिए कुछ जरूरी उपाय सुझाए गए हैं.
HPV वैक्सीन: सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच
HPV वैक्सीन विशेष रूप से उन वायरस (टाइप 16 और 18) से बचाता है जो कैंसर का कारण बनते हैं. CDC के अनुसार, 11 से 12 साल की उम्र में वैक्सीन लेना सबसे प्रभावी है. अगर आप 26 साल या उससे अधिक के हैं, तब भी डॉक्टर की सलाह पर यह टीका लगवा सकते हैं. यह न केवल आपको, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को भी सुरक्षित बनाता है.
सुरक्षित यौन संबंध (Safe Sexual Practices)
वैक्सीन लगवाने के बाद भी सावधानी ज़रूरी है. डॉ.के अनुसार, "वैक्सीन जोखिम कम करती है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं करती." इसलिए कंडोम का उपयोग करें और यौन साथियों (Partners) की संख्या सीमित रखें. अपनी सेक्सुअल हेल्थ के बारे में साथी से खुलकर बात करना एक जिम्मेदारी भरा कदम है.
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
आपकी आज की आदतें कल का स्वास्थ्य तय करेंगी. जैसे धूम्रपान. सिगरेट के हानिकारक रसायन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कमजोर कर देते हैं, जिससे शरीर HPV वायरस से नहीं लड़ पाता.फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं. नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी पीना और योग या ध्यान (Meditation) आपके शरीर को बीमारियों से लड़ने के लिए मजबूत बनाते हैं.
स्क्रीनिंग के बारे में जागरूक रहें
शुरुआती चरणों में इस कैंसर के लक्षण नहीं दिखते है, डॉक्टर सलाह देते हैं कि 20 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से पैप टेस्ट (Pap tests) और HPV टेस्ट करवाना चाहिए. ये टेस्ट कैंसर होने से पहले ही कोशिकाओं में होने वाले बदलावों को पकड़ लेते हैं, जिससे समय रहते इलाज संभव हो पाता है.