ठंड की मार: क्यों सर्दियों में बिगड़ती है सेहत? AIIMS एक्सपर्ट ने दिल–फेफड़ों पर ठंड का असर समझाया

AIIMS डॉक्टरों से जानिए सर्दियों में किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है.

Update: 2026-01-15 08:52 GMT

सर्दियों में बढ़ती ठंड सिर्फ कंपकंपी ही नहीं बढ़ाती, बल्कि दिल, फेफड़ों और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ा देती है. AIIMS के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ठंड के मौसम में हार्ट अटैक, एंजाइना, सांस की बीमारी और किडनी से जुड़ी समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ते हैं. AIIMS के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव नारंग के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं. इससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यही वजह है कि सर्दियों में हार्ट अटैक और एंजाइना के मामले अधिक सामने आते हैं. अगर किसी को सीने में जकड़न, सांस फूलना, अचानक थकान या पैरों में सूजन महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

डॉ. नारंग ने बताया कि ठंड के मौसम में शरीर की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है. यही वजह है कि सर्दियों में हार्ट अटैक और एंजाइना जैसी स्थितियां ज़्यादा देखने को मिलती हैं. खासतौर पर हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. डॉ. नारंग की सबसे अहम सलाह सुबह की दिनचर्या को लेकर है। उन्होंने कहा कि सर्दियों में बिस्तर से अचानक उठने से बचना चाहिए. पहले धीरे-धीरे उठें, कुछ देर बैठें और फिर खड़े हों. अचानक उठने से ब्लड प्रेशर गिर सकता है, जिससे चक्कर आने या गिरने का खतरा रहता है.

हाईपरटेंशन से पीड़ित लोगों को हफ्ते में कम से कम दो बार बीपी जांचना चाहिए

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सुबह-सुबह की ठंड सबसे ज़्यादा खतरनाक होती है. ऐसे में बहुत ठंड के समय वॉक पर जाना दिल के मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है. बेहतर है कि लोग दोपहर के समय हल्की धूप में टहलने जाएं और शरीर को अच्छी तरह ढककर रखें. ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित निगरानी की सलाह देते हुए डॉ. नारंग ने कहा कि घर में बीपी मशीन रखना फायदेमंद है. हाईपरटेंशन से पीड़ित लोगों को हफ्ते में कम से कम दो बार बीपी जांचना चाहिए. अगर रीडिंग 140/90 से ऊपर रहती है, तो डॉक्टर से दवाओं में बदलाव को लेकर सलाह जरूर लेनी चाहिए.

खान-पान का भी रखें ध्यान

उन्होंने खान-पान को लेकर भी सतर्क रहने की बात कही. ज्यादा नमक वाला खाना, प्रोसेस्ड फूड और कम पानी पीना सर्दियों में दिल पर दबाव बढ़ा सकता है. शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद ज़रूरी है — इसके लिए पानी के साथ-साथ चाय, दूध या सूप भी लिया जा सकता है. डॉ. नारंग ने यह भी बताया कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने से दिल की बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है. ऐसे में सीने में जकड़न, भारीपन, सांस फूलना या असहजता जैसे लक्षण दिखें तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड में खान-पान और दिनचर्या में की गई छोटी लापरवाहियां भी बड़ा खतरा बन सकती हैं. ज्यादा नमक, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाने से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है. कम पानी पीना भी नुकसानदेह है, क्योंकि इससे खून गाढ़ा होता है और दिल पर दबाव बढ़ता है.

इन लोगों को बरतनी चाहिए खास सावधानियां

डायबिटीज और किडनी के मरीजों को सर्दियों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है. AIIMS के प्रो. राजेश खुराना के अनुसार, ठंड में आलस्य बढ़ जाता है, जिससे शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है. इससे ब्लड शुगर असंतुलित हो सकती है और किडनी फंक्शन पर भी असर पड़ता है। हल्की वॉक, घर में योग या स्ट्रेचिंग को दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है. फेफड़ों, अस्थमा और COPD के मरीजों के लिए भी ठंडी हवा खतरा बन सकती है. AIIMS दिल्ली के मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि ठंडी हवा से सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे खांसी, बलगम और सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है. बाहर निकलते समय नाक और मुंह ढककर रखना बेहद जरूरी है.

बच्चों और बुजुर्गों पर ठंड का असर जल्दी होता है

बच्चों और बुजुर्गों पर ठंड का असर जल्दी होता है। बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, कम वजन वाले बच्चों और बुजुर्गों को ठंड और प्रदूषण से डबल खतरा रहता है। ऐसे में समय पर दवाइयां लेना, फॉलो-अप मिस न करना और लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है. डॉक्टरों की सलाह है कि सर्दियों में नियमित बीपी, शुगर और किडनी जांच कराते रहें, सुबह बहुत जल्दी टहलने से बचें और धूप निकलने के बाद ही बाहर जाएं. थोड़ी सी सतर्कता, सही खान-पान और नियमित जांच से सर्दियों में होने वाले बड़े खतरे टाले जा सकते हैं.

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