एक पल का गुस्सा बिगाड़ सकता है सेहत, आयुर्वेद से जानें क्रोध प्रबंधन के आसान उपाय

अत्यधिक क्रोध से शरीर और मन दोनों प्रभावित होते हैं; आयुर्वेद के सरल उपाय इसे नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

Update: 2026-02-20 14:15 GMT

नई दिल्ली: गुस्सा आना एक स्वाभाविक और अचानक उत्पन्न होने वाली भावना है, जिसे नियंत्रित करना हमेशा आसान नहीं होता।

हर व्यक्ति गुस्से का इज़हार अलग ढंग से करता है—कोई जोर-जोर से चिल्लाता है, तो कोई मन ही मन बड़-बड़ाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सिर्फ एक पल का गुस्सा हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों मानते हैं कि क्रोध केवल रिश्तों को प्रभावित नहीं करता, बल्कि हार्मोन, हृदय, पाचन तंत्र और मस्तिष्क पर भी नकारात्मक असर डालता है।

आज की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली गुस्से को बढ़ावा देती है। अधिक काम का दबाव, नींद की कमी और चिड़चिड़ापन अक्सर क्रोध के कारण बनते हैं। जब गुस्सा आता है, तो शरीर में हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं—एड्रेनालिन और कोर्टिसोल सक्रिय हो जाते हैं, दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है।

पाचन धीमा पड़ जाता है और अक्सर भूख कम हो जाती है। गुस्से में मस्तिष्क का निर्णय लेने वाला हिस्सा भी कमजोर हो जाता है। लगातार गुस्सा करने वालों में हाई बीपी, हार्ट डिजीज, माइग्रेन, एसिडिटी और नींद की समस्याएं अधिक पाई जाती हैं।

गुस्सा आने पर पहले गहरी और धीमी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। खुली जगह में जाकर हाथों को झटकें—यह तनाव और गुस्से को कम करने में मदद करता है। किसी बात पर प्रतिक्रिया देने से पहले 90 सेकंड का इंतजार करें, इससे क्रोध धीरे-धीरे कम होता है और आप बेहतर निर्णय ले पाते हैं।

इसके अलावा ठंडा पानी पीना और आंखों को ठंडे पानी से धोना भी राहत देता है। आयुर्वेद के अनुसार गुस्से का संबंध पित्त दोष से है। इसलिए पित्तशामक आहार जैसे नारियल पानी, सौंफ, धनिया, घी, खीरा और आंवला का सेवन क्रोध नियंत्रण में मदद करता है। (With inputs from IANS)

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