कम या ज्यादा नींद दोनों नुकसानदेह! जानिए क्या कहते हैं यूनानी चिकित्सा के सिद्धांत
यूनानी चिकित्सा के अनुसार, कम या ज्यादा नींद शरीर और मन दोनों के लिए हानिकारक हो सकती है।
नई दिल्ली: आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में कई लोग देर रात तक जागते हैं या जरूरत से ज्यादा सोते हैं, लेकिन नींद और जागने का संतुलन शरीर और मन के लिए बेहद जरूरी है। यूनानी चिकित्सा इसे स्वस्थ जीवन के मूलभूत सिद्धांतों में मानती है। संतुलन बिगड़ने पर शरीर में कई बीमारियां पैदा हो सकती हैं।
यूनानी पद्धति के अनुसार, नींद सिर्फ आराम का समय नहीं बल्कि शरीर की मरम्मत का अहम समय है। नींद के दौरान शरीर की अंदरूनी ऊर्जा (रूह-ए-हयाती) सुरक्षित रहती है और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत होती है। पाचन शक्ति संतुलित होती है, मस्तिष्क को शांति मिलती है और शरीर नई ऊर्जा से भरता है। नींद पूरी न होने पर कमजोरी, चिड़चिड़ापन और सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ता है।
इसके विपरीत, देर रात तक जागना भी हानिकारक है। लगातार जागने से शरीर में गर्मी और सूखापन बढ़ता है, जो मस्तिष्क, आंखों और नसों को प्रभावित करता है। सिरदर्द, जलन, बेचैनी, मुंह सूखना और थकान जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। लंबे समय तक ऐसा रहने से शरीर की नमी कम हो जाती है, जिससे कमजोरी और समय से पहले बुढ़ापा आ सकता है।
यूनानी चिकित्सा यह भी बताती है कि जरूरत से ज्यादा सोना भी नुकसानदेह है। अधिक नींद लेने से शरीर में ठंडक और नमी बढ़ती है, जिससे पाचन कमजोर होता है, आलस्य बढ़ता है और मोटापा, भारीपन, गैस या कफ जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
स्वस्थ रहने के लिए नींद का समय व्यक्ति के मिजाज और उम्र के अनुसार तय किया जाना चाहिए। बच्चों को अधिक नींद की जरूरत होती है, बुजुर्गों को कम। गर्म मिजाज वाले लोग संतुलित और हल्की नींद लें, जबकि ठंडे मिजाज वाले लोगों को जरूरत से ज्यादा न सोने का ध्यान रखना चाहिए। सबसे उत्तम नींद रात में ली गई और सुबह ताजगी के साथ आंख खुलने वाली मानी जाती है। (With inputs from IANS)