क्या पर्याप्त नींद के बाद भी आपका बच्चा थका हुआ उठता है? सुधारें सोने से पहले की ये 8 गलत आदतें
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए गहरी नींद किसी दवा से कम नहीं है.
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए गहरी नींद किसी दवा से कम नहीं है. गहरी नींद के दौरान ही शरीर में 'ग्रोथ हार्मोन' रिलीज होते हैं और मस्तिष्क यादों को सहेजता है. लेकिन अक्सर माता-पिता की यह शिकायत रहती है कि उनका बच्चा पर्याप्त सोने के बाद भी चिड़चिड़ा या थका हुआ रहता है. नोएडा स्थित सीनियर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा कपूर के अनुसार, "नींद की गुणवत्ता केवल घंटों पर नहीं, बल्कि सोने से पहले की आदतों पर निर्भर करती है उत्तेजक गतिविधियां दिमाग को शांत होने से रोकती हैं.इसलिए सोने से पहले इन 8 आदतों को तुरंत कहें 'ना'.
स्क्रीन का इस्तेमाल (Mobile/TV)
फोन, टैबलेट या टीवी से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में 'मेलाटोनिन' (नींद का हार्मोन) के उत्पादन को रोक देती है. सोने से कम से कम 1 घंटा पहले स्क्रीन बंद कर दें.
मीठे पेय पदार्थ
पैकेट बंद जूस, सोडा या चॉकलेट ड्रिंक्स में शुगर और कैफीन अधिक होता है, जो बच्चों को रात में बेचैन कर सकता है. इसके सेवन करने से बचे.
भारी भोजन
सोने से ठीक पहले भारी या तैलीय भोजन (जैसे बर्गर-फ्राइज) से सीने में जलन और नींद में खलल पड़ सकता है. डिनर हल्का रखें और सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खा लें.
शारीरिक भाग-दौड़ वाला खेल
सोने से ठीक पहले कूदना, दौड़ना या कुश्ती जैसा खेल खेलने से शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है, जिससे नींद आने में कठिनाई होती है. इसलिए रात को ऐसा भागदौड़ वाला खेल न खेंले.
अनियमित समय (Irregular Bedtimes)
रोजाना अलग-अलग समय पर सोने से शरीर की जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) बिगड़ जाती है. निरंतरता (Consistency) दिमाग को तैयार करती है कि अब सोने का समय है.
कैफीन का सेवन
कोल्ड ड्रिंक्स, कुछ फ्लेवर्ड मिल्क या कॉफी में मौजूद कैफीन नींद के चक्र को पूरी तरह खराब कर सकता है.
भावनात्मक बहस या तनाव
सोने से पहले बच्चे को डांटना या डरावनी बातें करना उनमें घबराहट पैदा कर सकता है. बेडरूम का माहौल सुरक्षित और शांत होना चाहिए.
ब्रश न करना
सोने से पहले दांत साफ न करने से रात भर मुंह में बैक्टीरिया पनपते हैं. यह केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि एक अच्छी हाइजीन रूटीन का भी हिस्सा है.