व्यायाम और जलवायु परिवर्तन का गहरा नाता, पैदल चलना और साइकिल चलाना सिर्फ सेहत ही नहीं, पर्यावरण के लिए भी वरदान
अगर हम पैदल चलने, साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने वाली योजनाएं बनाएं तो सेहत सुधार सकते हैं और नेचर भी.
हाल ही में नेचर हेल्थ (Nature Health) और नेचर मेडिसिन (Nature Medicine) पत्रिकाओं में प्रकाशित शोधों की एक सीरीज ने दुनिया का ध्यान एक महत्वपूर्ण विषय की ओर खींचा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर हम पैदल चलने, साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने वाली योजनाएं बनाएं, तो हम न केवल लोगों की सेहत सुधार सकते हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसी वैश्विक आपदा से भी लड़ सकते हैं. ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सहित कई संस्थानों के शोधकर्ताओं ने एक 'व्यायाम और जलवायु परिवर्तन' मॉडल विकसित किया है, जो टिकाऊ और समान समाधान पेश करता है.
व्यायाम और जलवायु: एक-दूसरे पर प्रभाव
शोध के अनुसार, व्यायाम और पर्यावरण का रिश्ता दोहरा है. भीषण गर्मी (Heatwaves) और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं बाहरी वातावरण को असुरक्षित बना देती हैं, जिससे लोगों का व्यायाम करना मुश्किल हो जाता है. जब लोग मोटर वाहनों के बजाय पैदल चलने या साइकिल चलाने (Active Transport) को अपनाते हैं, तो कार्बन उत्सर्जन कम होता है. यह कम उत्सर्जन वाली जीवनशैली जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करती है.
वैश्विक असमानता: अमीरों का 'शौक' और गरीबों की 'मजबूरी'
टेक्सास विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 68 देशों के डेटा का विश्लेषण किया और शारीरिक गतिविधि में भारी असमानता पाई. जिम जाना या खेलकूद जैसे शौक वाले व्यायामों में अमीर देशों के संपन्न पुरुषों की भागीदारी, गरीब देशों की महिलाओं की तुलना में 40% अधिक है. गरीब और वंचित आबादी में शारीरिक गतिविधि अधिक देखी गई, लेकिन यह शौक से नहीं बल्कि आर्थिक मजबूरी (जैसे भारी शारीरिक श्रम या मीलों पैदल चलना) के कारण थी.
नीतियों की कमी और क्रियान्वयन की चुनौती
200 देशों के 661 राष्ट्रीय नीति दस्तावेजों के अध्ययन में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. केवल 38.7% नीतियों में ही स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन जैसे कई सरकारी विभागों के बीच तालमेल देखा गया. विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के इंटरव्यू से पता चला कि व्यायाम को बढ़ावा देना अभी भी सरकारों की प्राथमिकता लिस्ट में काफी नीचे है. हालांकि, अब धीरे-धीरे इसमें सुधार हो रहा है.