सहदेवी: आयुर्वेद की चमत्कारी जड़ी-बूटी, किडनी से लेकर लिवर तक की रक्षक

सहदेवी एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो किडनी और लीवर की सेहत को मजबूत करती है।

Update: 2026-01-15 11:45 GMT

नई दिल्ली: सहदेवी आयुर्वेद की एक विशेष जड़ी-बूटी है, जिसे सदियों से प्राकृतिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आसानी से मिलने वाली यह जड़ी-बूटी अपने पत्तों, जड़ों और फूलों के औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है।

आयुर्वेद में सहदेवी को मूत्रवर्धक, पथरी विरोधी और शरीर को अंदर से शुद्ध करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और अंगों को स्वस्थ रखने में मदद करती है। खासतौर पर किडनी और लिवर की सेहत के लिए इसे बेहद लाभकारी माना जाता है, इसलिए इसे “सेहत की रक्षक जड़ी-बूटी” भी कहा जाता है।

किडनी और मूत्र संबंधी समस्याओं में सहदेवी का सेवन काफी प्रचलित है। पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, मूत्र प्रवाह में रुकावट या किडनी में पथरी जैसी परेशानियों में यह जड़ी-बूटी सहायक होती है। यह मूत्र प्रवाह को सुचारु बनाती है और मूत्राशय को साफ रखने में मदद करती है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, सहदेवी शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को निकालकर किडनी पर पड़ने वाले दबाव को कम करती है और उनके कार्य को बेहतर बनाती है।

सहदेवी लिवर के लिए भी लाभकारी है। यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है। जब लिवर ठीक से काम करता है, तो पाचन, त्वचा और ऊर्जा स्तर अपने आप बेहतर हो जाते हैं।

इसके अलावा, यह जड़ी-बूटी इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करती है। नियमित और सही मात्रा में सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और बार-बार होने वाले संक्रमणों से बचाव होता है। पाचन समस्याओं जैसे गैस, अपच, पेट फूलना और जलन में भी सहदेवी फायदेमंद मानी जाती है।

सहदेवी में सूजन कम करने और दर्द को कम करने वाले गुण भी पाए जाते हैं। जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द, सूजन और गठिया जैसी समस्याओं में इसका उपयोग किया जाता है।

हालांकि, सहदेवी जैसी कई अन्य खरपतवार भी होती हैं, जिनका सेवन हानिकारक हो सकता है। इसलिए इसे सही पहचान के साथ और किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से ही इस्तेमाल करना सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है। (With inputs from IANS)

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