फेस ट्रांसप्लांट (Face Transplant) क्या है? प्रक्रिया, चुनौतियां और सफलता की पूरी जानकारी

फेस ट्रांसप्लांट बेहद ही चैलेंज भरा काम है. इसे करने के लिए कई चीजों का ख्याल रखना पड़ता है.

Update: 2026-02-14 05:00 GMT

फेस ट्रांसप्लांट या चेहरा प्रत्यारोपण एक जटिल सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें एक मृत व्यक्ति (दाता) के चेहरे के ऊतकों (tissues) को उस व्यक्ति (प्राप्तकर्ता) के चेहरे पर लगाया जाता है जिसका चेहरा किसी दुर्घटना, जलन, बीमारी या जन्मजात विकृति के कारण गंभीर रूप से खराब हो गया हो. यह केवल एक प्लास्टिक सर्जरी नहीं है, बल्कि एक अत्यंत संवेदनशील 'माइक्रोसर्जरी' है.

यह प्रक्रिया कैसे की जाती है?

फेस ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण होती है, जिसमें अक्सर 15 से 30 घंटे का समय लगता है. डोनर सलेक्शन (Donor Selection)-सबसे पहले एक ऐसे मृत दाता की तलाश की जाती है जिसका बल्ड ग्रुप , टीशू टाइप (tissue type), त्वचा का रंग और उम्र प्राप्तकर्ता से मेल खाती हो. डॉक्टरों की दो टीमें एक साथ काम करती हैं. एक टीम दाता के चेहरे से त्वचा, मांसपेशियाँ, नसें, रक्त वाहिकाएं और कभी-कभी हड्डियों के हिस्से निकालती है. दूसरी टीम प्राप्तकर्ता के क्षतिग्रस्त ऊतकों को हटाकर जगह तैयार करती है.

माइक्रोसर्जरी- सर्जन सूक्ष्मदर्शी (microscope) की मदद से दाता के चेहरे की धमनियों और नसों को प्राप्तकर्ता की नसों से जोड़ते हैं ताकि चेहरे में रक्त संचार शुरू हो सके. इसके बाद मांसपेशियों और मुख्य तंत्रिकाओं (nerves) को जोड़ा जाता है ताकि व्यक्ति भविष्य में मुस्कुरा सके या चबा सके.

किसे होती है इसकी जरूरत?

फेस ट्रांसप्लांट उन लोगों के लिए अंतिम विकल्प होता है जिनका चेहरा पारंपरिक प्लास्टिक सर्जरी या स्किन ग्राफ्टिंग से ठीक नहीं किया जा सकता. यह प्रक्रिया व्यक्ति को केवल नया चेहरा ही नहीं देती, बल्कि उसे सांस लेने, बोलने, भोजन निगलने और चेहरे के भाव प्रकट करने जैसी बुनियादी क्षमताएं वापस पाने में मदद करती है.

मुख्य चुनौतियां और जोखिम

  • अस्वीकृति (Rejection)-शरीर का इम्यून सिस्टम नए चेहरे को एक 'बाहरी वस्तु' मानकर उस पर हमला कर सकता है. इससे बचने के लिए मरीज को जीवनभर इम्यूनोसप्रेसेन्ट (immunosuppressant) दवाएं लेनी पड़ती हैं.
  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव-एक नया चेहरा अपनाना मानसिक रूप से कठिन हो सकता है. व्यक्ति को आईने में एक अलग पहचान देखने के लिए मानसिक रूप से तैयार होना पड़ता है.
  • संक्रमण का खतरा-इम्यून सिस्टम को दबाने वाली दवाओं के कारण शरीर अन्य बीमारियों और संक्रमणों के प्रति संवेदनशील हो जाता है.
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