मिडिल एज में छोटी‑छोटी चीजें भूलना बड़े खतरे की चेतावनी, अल्जाइमर के हो सकते हैं शुरुआती संकेत

मिडिल एज में बार-बार भूलना अल्जाइमर का शुरुआती संकेत हो सकता है।

Update: 2026-03-06 10:00 GMT

नई दिल्ली: तेज़ रफ्तार जीवनशैली में कभी-कभी छोटी-मोटी बातें भूल जाना सामान्य माना जाता है, लेकिन जब भूलने की आदत रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगे या किसी परिचित का चेहरा, नाम या घर का रास्ता याद न रहे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

अल्जाइमर केवल बढ़ती उम्र का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण व्यक्ति की याददाश्त, सोचने की क्षमता और व्यवहार प्रभावित होने लगते हैं।

कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य भूलने की आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसके संकेत बीमारी शुरू होने से कई साल पहले दिखाई देने लगते हैं। समय रहते पहचान और सही जीवनशैली अपनाने से इसकी प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।

अल्जाइमर सीधे तौर पर दिमाग से जुड़ी बीमारी है, क्योंकि दिमाग ही शरीर के सभी अंगों की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। आजकल कम उम्र के लोग भी भूलने की समस्या का सामना कर रहे हैं। इसके पीछे हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, तनाव, असंतुलित खानपान और पर्याप्त नींद न लेना जैसे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

फरवरी में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोध में यह सामने आया कि एक साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए अल्जाइमर के शुरुआती संकेत तीन से चार साल पहले ही पहचाने जा सकते हैं। इस शुरुआती पहचान के बाद सही आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है।

अल्जाइमर के शुरुआती लक्षणों में अक्सर रोजमर्रा की चीजें भूल जाना, परिचित लोगों के नाम याद न रहना, अचानक कोई काम भूल जाना और दिनचर्या को लेकर भ्रमित होना शामिल हैं। उम्र बढ़ने के साथ हल्की भूलने की समस्या सामान्य हो सकती है, लेकिन यदि मिडिल एज में यह समस्या लगातार बढ़ने लगे तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसे में नियमित जांच और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

इस बीमारी से बचाव में खानपान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरी सब्जियां, बेरी, साबुत अनाज, ड्राई फ्रूट्स और ऑलिव ऑयल को आहार में शामिल करना दिमाग की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि भी बेहद जरूरी है। वॉकिंग या एरोबिक एक्सरसाइज से दिमाग में रक्त प्रवाह बेहतर होता है और न्यूरॉन्स को मजबूती मिलती है। मानसिक रूप से सक्रिय रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पजल्स हल करना, किताबें पढ़ना, नई चीजें सीखना और संगीत सुनना दिमाग के कनेक्शन को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

अध्ययनों के अनुसार, संगीत सुनने से डिमेंशिया का खतरा लगभग 39 प्रतिशत तक कम हो सकता है। साथ ही दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत और सामाजिक संपर्क बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि अकेलापन मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दिल और दिमाग की सेहत आपस में जुड़ी होती है। इसलिए ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज को नियंत्रित रखना जरूरी है। इसके साथ ही पर्याप्त और अच्छी नींद लेना भी दिमाग को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (With inputs from IANS)

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