ब्रेन फॉग कहीं दिल की बीमारी का संकेत तो नहीं? जानें वैज्ञानिक कारण

ब्रेन फॉग दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

Update: 2026-01-23 11:30 GMT

नई दिल्ली: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में थकान, तनाव और भूलने की आदत को लोग अक्सर सामान्य मान लेते हैं। लेकिन कई बार ये लक्षण सिर्फ मानसिक दबाव नहीं, बल्कि किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा भी हो सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार ध्यान भटकना, नाम याद न रहना या दिमाग का बोझिल लगना केवल दिमाग की कमजोरी नहीं, बल्कि दिल से जुड़ी परेशानी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

आमतौर पर हार्ट डिजीज को सीने में दर्द या सांस फूलने से जोड़ा जाता है, लेकिन कई मामलों में यह दिमाग से जुड़े लक्षणों के जरिए धीरे-धीरे सामने आती है।

ब्रेन फॉग वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को याददाश्त कमजोर लगती है, सोचने-समझने में दिक्कत होती है और मन सुस्त-सा महसूस करता है। अधिकतर लोग इसे उम्र या तनाव का असर मानकर अनदेखा कर देते हैं।

असल में दिल और दिमाग के बीच गहरा तालमेल होता है। जब दिल ठीक से काम करता है, तो दिमाग भी बेहतर ढंग से काम करता है। लेकिन दिल कमजोर पड़ने पर दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे ब्रेन फॉग जैसे लक्षण उभर सकते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, यह समस्या केवल सतही नहीं होती। कई मामलों में इसका कारण दिमाग तक पहुंचने वाले ब्लड फ्लो में कमी होती है। जब दिल सही मात्रा में खून पंप नहीं कर पाता, तो याददाश्त, फोकस और सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ता है।

2024 में जर्नल ऑफ सेरेब्रल ब्लड फ्लो एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, दिल की हल्की कमजोरी भी दिमाग तक खून के प्रवाह को कम कर सकती है। इसलिए बार-बार भूलना या एकाग्रता में कमी दिल की चेतावनी भी हो सकती है।

ऐसे में विशेषज्ञ दिल की नियमित जांच कराने की सलाह देते हैं। ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और ब्लड फ्लो जैसे छोटे-छोटे संकेतों पर ध्यान देना भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा सकता है। (With inputs from IANS)

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