बढ़ती उम्र में याददाश्त वापस लौटाएगी आपकी 'आंत', वैज्ञानिकों ने खोजा दिमाग तेज करने का अनोखा तरीका
अक्सर माना जाता है कि उम्र के साथ याददाश्त का कमजोर होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे बदला नहीं जा सकता.
अक्सर माना जाता है कि उम्र के साथ याददाश्त का कमजोर होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे बदला नहीं जा सकता. लेकिन स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है. रिसर्चर ने पाया है कि हमारी आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया (Gut Microbiome) और दिमाग के बीच एक गहरा संबंध है, जिसे नियंत्रित करके उम्र से संबंधित याददाश्त की कमी को पलटा जा सकता है. यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल नेचर (Nature) में प्रकाशित हुआ है, जो बुढ़ापे में मानसिक रूप से फिट रहने की नई उम्मीद जगाता है.
आंत और दिमाग का संबंध: कैसे काम करता है यह सिस्टम?
हमारी आंतों में खरबों बैक्टीरिया होते हैं. स्टडी के अनुसार, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, इन बैक्टीरिया की संरचना में बदलाव आता है. उम्र बढ़ने के साथ आंतों में Parabacteroides goldsteinii जैसे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है. ये बैक्टीरिया 'मीडियम-चेन फैटी एसिड' नामक तत्व छोड़ते हैं, जो आंतों की इम्यून कोशिकाओं में सूजन पैदा करते हैं. यह सूजन 'वेगस नर्व' (Vagus Nerve) को प्रभावित करती है, जो पेट से दिमाग तक सिग्नल पहुंचाने वाली मुख्य नस है. जब वेगस नर्व ठीक से सिग्नल नहीं भेज पाती, तो दिमाग का हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) हिस्सा,जो याददाश्त और दिशा-ज्ञान के लिए जिम्मेदार है—कमजोर पड़ने लगता है.
चूहों पर सफल परीक्षण: 'भुलक्कड़' से बने 'स्मार्ट'
वैज्ञानिकों ने बूढ़े और जवान चूहों पर प्रयोग किए. उन्होंने देखा कि जब बूढ़े चूहों की वेगस नर्व को उत्तेजित (Stimulate) किया गया, तो वे अपनी उम्र के अन्य चूहों की तुलना में बहुत अधिक सक्रिय हो गए. वे भूलभुलैया (Maze) से निकलने और नई वस्तुओं को पहचानने में उतने ही तेज हो गए जितने कि जवान चूहे. स्टैनफोर्ड के सहायक प्रोफेसर क्रिस्टोफ थाइस ने कहा, "हमने सीखा कि याददाश्त में गिरावट का समय तय नहीं है. इसे शरीर के माध्यम से बदला जा सकता है, और इसमें हमारा पाचन तंत्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है."
क्या याददाश्त की गोली आएगी?
वरिष्ठ लेखिका मायन लेवी के अनुसार, चूंकि पाचन तंत्र तक पहुंच आसान है, इसलिए खान-पान या दवाओं के जरिए आंतों के बैक्टीरिया को संतुलित करना दिमाग को तेज रखने की एक बेहतरीन रणनीति हो सकती है.