क्यों फिट बॉडी और माइंड के लिए जरूरी है 'हिट' माइक्रोबायोम?
हिट माइक्रोबायोम हमारे शरीर और मस्तिष्क को फिट रखने के लिए बेहद जरूरी है।
नई दिल्ली: मानव शरीर में मौजूद सूक्ष्मजीवों का एक विशाल और जटिल संसार है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘माइक्रोबायोम’ कहा जाता है। यह मुख्य रूप से हमारी आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और उनके जीन्स का मिश्रण होता है, जिन्हें केवल माइक्रोस्कोप की सहायता से देखा जा सकता है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये न केवल भोजन के पाचन में मदद करते हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को भी मजबूत बनाकर शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंस के अनुसार, माइक्रोबायोम का मतलब उन लाभकारी सूक्ष्मजीवों से है जो आंतों में रहते हैं और स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। ये अच्छे बैक्टीरिया पाचन सुधारते हैं, इम्यून सिस्टम को सुदृढ़ करते हैं, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखते हैं और मेटाबॉलिज्म को संतुलित करते हैं। स्वस्थ माइक्रोबायोम का होना फिट और सक्रिय जीवनशैली के लिए बेहद जरूरी है। हेल्दी माइक्रोबायोम मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, एलर्जी और सूजन जैसी समस्याओं से बचाव में मदद करता है।
जीवन की शुरुआत में ही माइक्रोबायोम बनना शुरू हो जाता है, और यह आहार, दवाओं, व्यायाम और पर्यावरण के प्रभाव से लगातार बदलता रहता है। ये सूक्ष्मजीव जटिल कार्बोहाइड्रेट और फाइबर को पचाकर शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFA) बनाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं, आंत की झिल्ली को स्वस्थ रखते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। अच्छे बैक्टीरिया हानिकारक बैक्टीरिया के बढ़ने से रोकते हैं और रोगजनकों से लड़ते हैं।
फिट रहने के लिए 'हिट' माइक्रोबायोम का होना आवश्यक है। यह पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है, पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ाता है और मांसपेशियों को मजबूत करता है। स्वस्थ माइक्रोबायोम वजन नियंत्रण, ऊर्जा स्तर और मूड सुधारने में सहायक है।
आंतों का माइक्रोबायोम मेटाबॉलिज्म पर भी गहरा असर डालता है। ये सूक्ष्मजीव जटिल कार्बोहाइड्रेट को लाभकारी फैटी एसिड में बदलते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उनकी क्षमता में बदलाव आता है, जिससे हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
जीवन के विभिन्न चरणों में माइक्रोबायोम बदलता रहता है। अनुसंधान के अनुसार, कुछ मेटाबोलाइट्स जैसे 3-इंडॉक्सिल-सल्फेट बचपन में अधिक होते हैं, फिर कम हो जाते हैं, और युवावस्था में फिर बढ़ते हैं। ये मस्तिष्क के विकास और कार्य में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए बचपन में पोषण और पर्यावरण का असर भविष्य में बीमारियों के जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, माइक्रोबायोम को स्वस्थ बनाए रखने के लिए फाइबर युक्त आहार जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें। दही, छाछ और अन्य प्रोबायोटिक्स अच्छे बैक्टीरिया की वृद्धि में मदद करते हैं। व्यायाम नियमित करें और फाइबर को धीरे-धीरे अपने आहार में शामिल करें ताकि गैस या ब्लोटिंग जैसी समस्याएँ न हों।
प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक चीनी और अनावश्यक एंटीबायोटिक्स से बचें, क्योंकि ये अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं। इस तरह, एक संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और प्रोबायोटिक सेवन से माइक्रोबायोम स्वस्थ रहता है, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है, बीमारियों की संभावना कम होती है और फिटनेस बनाए रखना आसान होता है। (With inputs from IANS)