तला-भुना खाना सेहत को पहुंचा रहा नुकसान? पान का पत्ता पाचन तंत्र को कर सकता है मजबूत
पान का पत्ता पाचन तंत्र को मजबूत कर तला-भुना खाने के नुकसान से बचा सकता है।
नई दिल्ली: आज की तेज़-तर्रार जीवनशैली में लोग घर का साधारण भोजन छोड़कर बाहर का तला-भुना, मसालेदार और फास्ट फूड ज्यादा खाने लगे हैं। देर रात तक जागना, तनाव और अनियमित दिनचर्या ने पाचन तंत्र पर भारी असर डाला है, जिससे गैस, पेट फूलना, जलन, कब्ज और भूख न लगना जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
आयुर्वेद में ऐसे कई प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं जो पाचन स्वास्थ्य सुधारने में मदद करते हैं। इनमें से एक प्रभावी उपाय है पान का पत्ता। सही तरीके से सेवन करने पर यह शरीर के पाचन तंत्र को संतुलित करने, पेट की गैस और सूजन कम करने और पाचन एंजाइमों को सक्रिय करने में सहायक होता है।
पान चबाने से लार का निर्माण बढ़ता है, जो भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है और पेट पर बोझ कम करता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तेल और फाइबर आंतों की गतिविधि को संतुलित करके गैस और भारीपन दूर करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, पान का पत्ता वात दोष को संतुलित करता है, जो पेट दर्द और गैस का प्रमुख कारण है।
इसके अलावा, पान के पत्ते में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो अतिरिक्त एसिड को नियंत्रित कर पेट की जलन और एसिडिटी कम करते हैं। यह कब्ज में भी सहायक होता है, क्योंकि आंतों की मांसपेशियों को सक्रिय कर भोजन को आगे बढ़ाता है और मल को आसानी से निकालने में मदद करता है। भूख कम होने पर यह पाचन रसों को सक्रिय करके भूख बढ़ाने में भी मदद करता है।
पान का पत्ता केवल पाचन तक सीमित नहीं है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह की सफाई, मसूड़ों की सूजन और हानिकारक बैक्टीरिया कम करने में सहायक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह नसों को आराम देता है, दिमाग को शांत करता है और तनाव कम करने में मदद करता है।
इसके अलावा, पान के पत्ते में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सूजन कम करने, त्वचा को स्वस्थ रखने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। परंपरागत रूप से यह अस्थमा जैसी सांस की समस्याओं में सहायक उपाय के रूप में भी इस्तेमाल होता रहा है।
हालांकि, किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। (With inputs from IANS)