ठंड में बढ़ रही ब्रेन स्ट्रोक मरीजों की संख्या, डॉक्टरों ने दी इससे बचने की ये सलाह

राज्य में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) के मामलों देखने को मिला है.

Update: 2026-01-16 07:30 GMT

राज्य में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) के मामलों देखने को मिला है. प्रमुख अस्पतालों के न्यूरोलॉजी विभाग, आईसीयू और इमरजेंसी सेवाओं में मरीजों की संख्या प्री-विंटर (सर्दियों से पहले) की तुलना में काफी बढ़ गई है. रिम्स (RIMS) के आंकड़ों के अनुसार, न्यूरोलॉजी विभाग में रोजाना 10 से 15 ब्रेन स्ट्रोक के मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि सर्दियों से पहले यह संख्या मात्र 2 से 4 थी. वहीं सदर अस्पताल में भी मामलों में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जहां अब हरदिन लगभग 10 मरीज आ रहे हैं.

ठंड और स्ट्रोक को लेकर डॉक्टरों की राय

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दी और ब्रेन स्ट्रोक के बीच सीधा संबंध है.डॉ. सुरेंद्र कुमार (रिम्स) के अनुसार, अचानक तापमान गिरने से नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर (BP) तेजी से बढ़ता है. ज्यादा ठंड के कारण खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे दिमाग तक खून पहुंचने में दिक्कत आती है, बाधा आती है.

डॉ. विकास कुमार ने चिंता जताई कि अब 25 से 45 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, जबकि पहले यह केवल 45 से अधिक उम्र वालों में देखा जाता था. डॉ. दीपक चंद्र प्रकाश (मणिपाल अस्पताल) बताते हैं कि सर्दियों में 'इंट्रासेरेब्रल हैमरेज' (दिमागी ब्लीडिंग) के मामले 30% तक बढ़ जाते हैं, जिसका मुख्य कारण अनियंत्रित हाई बीपी है.

इसे बचने के लिए क्या करना चाहिए

गोल्डन ऑवर (Golden Hour) का महत्व, स्ट्रोक के लक्षण दिखने के शुरुआती 3 से 6 घंटे बेहद जरूरी होते हैं. अगर इस दौरान मरीज को इलाज मिल जाए, तो लकवा या स्थायी विकलांगता से बचा जा सकता है. ठंड में बीपी बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए हाइपरटेंशन के मरीज अपनी दवाएं समय पर लें और लापरवाही न बरतें.हाई कोलेस्ट्रॉल और अस्वास्थ्यकर खान-पान से बचें. खुद को गर्म कपड़ों से ढक कर रखें और अचानक ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचें.

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