रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के साथ फेफड़ों व हृदय के लिए फायदेमंद है भुजंगासन

भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है और फेफड़ों व हृदय के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

Update: 2026-03-05 12:00 GMT

नई दिल्ली: आज की तेज़ और व्यस्त जीवनशैली में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना हर व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। लगातार काम का दबाव, तनाव और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली न केवल शरीर पर बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालती है। ऐसे में योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

इसी दिशा में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने लोगों को योग और प्राणायाम के सही अभ्यास, उनके तरीकों और लाभों के प्रति जागरूक करने की पहल की है। इनमें से एक महत्वपूर्ण अभ्यास है पूर्ण भुजंगासन, जो शरीर और मन दोनों के लिए कई तरह से लाभकारी है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, पूर्ण भुजंगासन न केवल रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, बल्कि फेफड़ों और हृदय के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह आसन नियमित रूप से करने से शरीर के कई अंगों में सकारात्मक बदलाव आते हैं और सामान्य जीवनशैली में होने वाली समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है।

पूर्ण भुजंगासन करने की प्रक्रिया सरल है, लेकिन इसे सही तरीके से करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले भुजंगासन की मुद्रा में आएं और सामान्य श्वास लें। इसके बाद घुटनों को मोड़कर पंजों को ऊपर उठाएं। सिर, गर्दन और कंधों को पीछे की ओर तानें और पैरों की उंगलियों से सिर को छूने का प्रयास करें। इस स्थिति में कुछ समय रुकें और फिर धीरे-धीरे वापस मूल स्थिति में आएं। अंत में शिथिल होकर लेटें और श्वास व हृदय की गति को सामान्य होने दें।

सर्वश्रेष्ठ समय सुबह खाली पेट ब्रह्ममुहूर्त में माना गया है, हालांकि इसे शाम में भोजन के 4-5 घंटे बाद भी किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, पेट की चर्बी घटती है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और श्वसन तंत्र की क्षमता में सुधार आता है। साथ ही यह पीठ दर्द को कम करता है, तनाव और थकान को दूर करता है और पूरे शरीर में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआती दिनों में पूर्ण भुजंगासन को किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक या विशेषज्ञ की देखरेख में ही धीरे-धीरे सीखें, ताकि गलत मुद्रा अपनाने से चोट या मांसपेशियों में तनाव न हो। सही तरीके से अभ्यास करने पर यह आसन शरीर को मजबूत बनाने के साथ मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करता है। आयुष मंत्रालय की इस पहल के माध्यम से लोग अपने स्वास्थ्य और जीवनशैली को सुधार सकते हैं और शारीरिक व मानसिक रूप से सशक्त बन सकते हैं। (With inputs from IANS)

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