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अतालता(Arrhythmia): जब दिल की धड़कन अपनी लय खो देती है

आपका दिल हर धड़कन के साथ आपकी ज़िंदगी की लय बनाए रखता है।
लेकिन क्या होता है जब यही लय बिगड़ जाती है — जब दिल की धड़कन बहुत तेज़, बहुत धीमी या अनियमित हो जाती है?
ऐसी स्थिति को अतालता (Arrhythmia) कहा जाता है।
अतालता दिल की विद्युत प्रणाली (electrical system) में होने वाली सबसे आम परेशानियों में से एक है।
कुछ मामलों में यह हानिरहित होती है, लेकिन अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह स्ट्रोक, हार्ट फेलियर या अचानक कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकती है।
अतालता क्या है?
अतालता (Arrhythmia) वह स्थिति है जिसमें दिल की धड़कन की गति या लय अनियमित हो जाती है, और इसका कारण दिल की विद्युत प्रणाली (electrical system) में परेशानी होती है।
जब दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाले विद्युत संकेत सही ढंग से काम नहीं करते, तो दिल —
• बहुत तेज़ धड़क सकता है (टैकीकार्डिया - Tachycardia)
• बहुत धीमा धड़क सकता है (ब्रेडीकार्डिया - Bradycardia)
• या अनियमित रूप से धड़क सकता है (फिब्रिलेशन या प्रीमेच्योर कॉन्ट्रैक्शन)
यह समझना ज़रूरी है कि हर अनियमित धड़कन ख़तरनाक नहीं होती,
लेकिन कुछ मामलों में यह दिल की किसी छिपी हुई बीमारी का संकेत भी हो सकती है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
अतालता के कारण
दिल की धड़कन में परेशानी कई कारणों से हो सकती है, जिनमें शामिल हैं —
• उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) या धमनियों में रुकावट (Coronary Artery Disease)
• इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन — जैसे पोटैशियम, कैल्शियम या मैग्नीशियम की कमी
• थायरॉइड की परेशानी, विशेष रूप से हाइपरथायरॉइडिज़्म
• पहले हुए दिल के दौरे से हृदय की मांसपेशियों को हुआ नुकसान
• तनाव या अत्यधिक चिंता
• धूम्रपान, शराब या कैफीन का अधिक सेवन
• कुछ दवाओं या नशीले पदार्थों का प्रभाव
इन कारणों से दिल की विद्युत प्रणाली प्रभावित होती है, जिससे धड़कन की गति और लय में असंतुलन आ जाता है।
अतालता के लक्षण
अतालता के लक्षण उसकी प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करते हैं। कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते, जबकि दूसरों में स्पष्ट संकेत महसूस हो सकते हैं।
सामान्य लक्षण:
• दिल का तेज़ धड़कना या फड़कन महसूस होना
• धड़कन का रुक-रुक कर चलना या तेज़ी से बढ़ना
• चक्कर आना या अचानक बेहोश हो जाना
• सांस फूलना या घुटन महसूस होना
• थकान या कमजोरी
• सीने में दर्द या असहजता
अगर ये लक्षण बार-बार महसूस हों या लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
अतालता के प्रकार
अतालता को मुख्य रूप से तीन प्रमुख प्रकारों में बाँटा जाता है —
1. टैकीकार्डिया (Tachycardia): जब दिल की धड़कन सामान्य से तेज़ हो जाती है (100 बीट प्रति मिनट से अधिक)।
उदाहरण: सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (SVT) या वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया।
2. ब्रेडीकार्डिया (Bradycardia): जब दिल की धड़कन सामान्य से धीमी हो जाती है (60 बीट प्रति मिनट से कम)।
उदाहरण: साइनस ब्रेडीकार्डिया या हार्ट ब्लॉक।
3. अनियमित धड़कन (Irregular Heartbeat): जब दिल की लय असंतुलित या असामान्य हो जाती है।
उदाहरण: एट्रियल फिब्रिलेशन या वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन।
हर प्रकार की अतालता का प्रभाव और गंभीरता अलग होती है, इसलिए सही पहचान और समय पर जांच बहुत आवश्यक है।
कब डॉक्टर से परामर्श लें
अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई महसूस हो, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें —
• सीने में दर्द या दबाव जो कुछ मिनट से ज़्यादा बना रहे
• दिल की धड़कन का बहुत तेज़ या अनियमित होना
• सांस फूलना या अचानक थकान महसूस होना
• चक्कर आना या बेहोशी आना
• दिल के “रुकने” या “छलांग लगाने” जैसा एहसास होना
समय पर परामर्श लेने से गंभीर स्थितियाँ जैसे स्ट्रोक, हार्ट फेलियर या अचानक कार्डियक अरेस्ट से बचाव संभव है।
क्या अतालता जानलेवा है? क्या इसके साथ जीवन संभव है?
हर अतालता जानलेवा नहीं होती।
कई लोग हल्की या कभी-कभार होने वाली अतालता के साथ पूरी तरह सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं — खासकर जब इसका सही इलाज और नियमित निगरानी की जा रही हो।
हालाँकि, गंभीर अतालता— विशेष रूप से वे जो दिल की पंपिंग क्षमता को प्रभावित करती हैं — अगर अनदेखी कर दी जाएँ, तो हार्ट फेलियर या अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं।
इसलिए, डॉक्टर की सलाह और नियमित फॉलो-अप पर बने रहना बेहद ज़रूरी है।
कौन-सी कमी अतालता का कारण बन सकती है?
शरीर में कुछ आवश्यक मिनरल्स (minerals) की कमी दिल की धड़कन की लय को प्रभावित कर सकती है।
पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स दिल की विद्युत गतिविधि को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इनकी कमी से दिल की धड़कन असामान्य या अनियमित हो सकती है।
इसलिए, संतुलित आहार लेना और शरीर में पोषक तत्वों का स्तर बनाए रखना दिल की लय को स्थिर रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
जांच और पहचान (Tests to Detect Arrhythmia)
अतालता की सही पहचान के लिए डॉक्टर कई तरह की जांचें करवाते हैं, जो दिल की विद्युत गतिविधि और कार्यप्रणाली को समझने में मदद करती हैं —
• ईसीजी (ECG - Electrocardiogram): दिल की धड़कन और उसकी लय में होने वाले असामान्य बदलावों का पता लगाता है।
• होल्टर मॉनिटरिंग (Holter Monitoring): 24–48 घंटे तक दिल की धड़कन की निरंतर रिकॉर्डिंग की जाती है।
• इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram): दिल की संरचना और पंपिंग क्षमता की जांच करता है।
• स्ट्रेस टेस्ट (Stress Test): व्यायाम या परिश्रम के दौरान दिल की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करता है।
• इलेक्ट्रोफिज़ियोलॉजिकल स्टडी (EPS): दिल की विद्युत प्रणाली में समस्या की सटीक जगह पहचानने के लिए की जाती है।
समय पर जांच करवाना यह तय करने में मदद करता है कि मरीज को जीवनशैली में बदलाव, दवाइयों, या चिकित्सीय प्रक्रिया में से कौन-सा उपचार सबसे उपयुक्त रहेगा।
क्या चिंता (Anxiety) से भी अतालता हो सकती है?
हाँ, लगातार तनाव या चिंता भी अतालता का एक कारण बन सकती है।
जब हम अत्यधिक तनाव में होते हैं, तो शरीर में एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो दिल की धड़कन को तेज़ या अनियमित कर सकता है।
कुछ लोगों में यह अस्थायी होता है, लेकिन यदि तनाव लगातार बना रहे, तो यह हार्ट रिदम डिसऑर्डर (Heart Rhythm Disorder) को बढ़ा सकता है।
इसलिए तनाव को कम करने के लिए ध्यान, योग, पर्याप्त नींद और संतुलित जीवनशैली अपनाना दिल की सेहत के लिए बेहद ज़रूरी है।
अतालता का उपचार (Treatment of Arrhythmia)
अतालता का इलाज उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है।
इलाज का मुख्य उद्देश्य दिल की धड़कन को सामान्य लय में लाना और भविष्य की परेशानियों से बचाव करना होता है।
सामान्य उपचार उपाय:
• जीवनशैली में सुधार: धूम्रपान और शराब से परहेज़ करें, कैफीन का सेवन कम करें, तनाव को नियंत्रित रखें और नियमित व्यायाम करें।
• डॉक्टर द्वारा सुझाए गए चिकित्सीय उपचार:
o कार्डियोवर्ज़न (Cardioversion): दवा या इलेक्ट्रिकल थेरेपी के माध्यम से दिल की लय को सामान्य करना।
o कैथेटर एब्लेशन (Catheter Ablation): दिल के उस हिस्से को निष्क्रिय करना जो गलत विद्युत संकेत भेजता है।
o पेसमेकर या आईसीडी (Pacemaker / ICD): दिल की धड़कन को नियंत्रित और स्थिर रखने वाला उपकरण लगाया जाता है।
सही इलाज, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली के साथ अधिकांश लोग अतालता के बावजूद सामान्य, एक्टिव और लंबा जीवन जी सकते हैं।
दिल की धड़कन को सही लय में रखें
अतालता हमेशा खतरे की निशानी नहीं होती, लेकिन इसे हल्के में लेना भी सही नहीं है।
समय पर जांच, सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली से इस स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
अपने दिल के संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें —
उसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव-मुक्त दिनचर्या का सहारा दें।
संतुलित लय में धड़कता दिल ही स्वस्थ जीवन की सबसे सुंदर धुन है।
American Heart Association (AHA). Arrhythmia — Types, Symptoms, and Treatment. Updated 2024.
National Heart, Lung, and Blood Institute (NHLBI). What Is an Arrhythmia? U.S. Department of Health and Human Services, 2023.
World Health Organization (WHO). Cardiovascular Diseases (CVDs): Key Facts. 2024.
Mayo Clinic. Heart Arrhythmia: Symptoms and Causes. Reviewed 2024.
Cleveland Clinic. Heart Arrhythmia: Types, Causes, and Diagnosis. Updated 2023.
European Society of Cardiology (ESC). 2022 ESC Guidelines for the Management of Patients with Ventricular Arrhythmias and the Prevention of Sudden Cardiac Death. Eur Heart J. 2022.
Dr Prem Aggarwal, (MD Medicine, DNB Cardiology) is a Cardiologist by profession and also the Co-founder of Medical Dialogues. He is the Chairman of Sanjeevan Hospital in Central Delhi and also serving as the member of Delhi Medical Council

