सीलिएक बीमारी में क्यों जरूरी है ग्लूटेन-फ्री डाइट? जानिए कारण

सीलिएक बीमारी में आंतों को सुरक्षित रखने के लिए ग्लूटेन-फ्री डाइट जरूरी है।

Update: 2026-03-07 14:00 GMT

नई दिल्ली: सीलिएक बीमारी एक गंभीर ऑटोइम्यून रोग है, जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) ग्लूटेन नामक प्रोटीन को हानिकारक समझकर उसके खिलाफ प्रतिक्रिया देने लगता है। ग्लूटेन मुख्य रूप से गेहूं, जौ और राई जैसे अनाज में पाया जाता है।

जब सीलिएक रोग से पीड़ित व्यक्ति ग्लूटेन का सेवन करता है, तो उसकी छोटी आंत की अंदरूनी परतों को नुकसान पहुंचता है। इससे आंत की सतह पर मौजूद छोटे-छोटे ऊतक (विली) प्रभावित हो जाते हैं, जो सामान्य रूप से शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परिणामस्वरूप शरीर को जरूरी पोषण सही तरीके से नहीं मिल पाता और समय के साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, सीलिएक बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए ग्लूटेन-फ्री डाइट अपनाना बेहद जरूरी होता है। यह डाइट न केवल आंतों को और अधिक नुकसान से बचाती है, बल्कि शरीर में पोषक तत्वों की कमी को भी पूरा करने में मदद करती है। यदि मरीज लंबे समय तक ग्लूटेन का सेवन करते रहते हैं, तो उन्हें पेट दर्द, दस्त (डायरिया), कब्ज, थकान और तेजी से वजन कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, लगातार ग्लूटेन खाने से एनीमिया, हड्डियों की कमजोरी, विटामिन और खनिजों की कमी जैसी गंभीर समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं।

सीलिएक रोग को नियंत्रित रखने के लिए सही खान-पान की जानकारी होना बेहद जरूरी है। ग्लूटेन-फ्री डाइट में ताजे फल और सब्जियां सुरक्षित और पौष्टिक विकल्प माने जाते हैं। इसके अलावा मिलेट्स (मोटे अनाज), कॉर्न मील, बीन्स और नट्स जैसी चीजों को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। ये खाद्य पदार्थ शरीर को आवश्यक कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर प्रदान करते हैं, जिससे ऊर्जा बनी रहती है और समग्र स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

दूसरी ओर, ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें ग्लूटेन पाया जाता है, उनसे पूरी तरह परहेज करना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर ब्रेड, पास्ता, केक, पिज़्ज़ा और अन्य बेकरी उत्पाद, जो गेहूं, जौ, राई या कुछ मामलों में ओट्स से बनाए जाते हैं, सीलिएक मरीजों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इनका सेवन करने से आंतों की समस्या बढ़ सकती है और बीमारी के लक्षण फिर से उभर सकते हैं।

ग्लूटेन-फ्री डाइट केवल बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में भी मदद करती है। सही आहार अपनाने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है, शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है और ऊर्जा का स्तर भी संतुलित बना रहता है।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सीलिएक मरीजों को बाहर खाना खाते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें ऐसे भोजन से बचना चाहिए, जिसमें ग्लूटेन होने की संभावना हो। इसके बजाय वे मिलेट्स, कॉर्न मील, बीन्स और नट्स से बने विकल्प चुन सकते हैं, ताकि उनका आहार सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक बना रहे। (With inputs from IANS)

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