खाना बनाने से पहले चावल भिगोना क्यों है जरूरी, जानें इसके स्वास्थ्य लाभ
भोजन में उपयोग से पहले चावल भिगोने से पाचन सुधरता है और पौष्टिकता बढ़ती है।
नई दिल्ली: चावल पचने में आसान भोजन है, लेकिन अधिकतर लोग इसे सही तरीके से नहीं पकाते। कई लोग जल्दी में चावल धोते ही तुरंत उबाल देते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए सही नहीं माना जाता। एक्सपर्ट्स के अनुसार, चावल को पकाने से पहले कुछ समय पानी में भिगोना बेहद लाभकारी है।
चावल में फाइटिक एसिड पाया जाता है, जो आयरन, जिंक और कैल्शियम जैसे जरूरी मिनरल्स के अवशोषण को रोकता है। यदि चावल को बिना भिगोए पकाया जाए, तो ये पोषक तत्व शरीर में ठीक से नहीं पहुंच पाते। चावल को भिगोने से फाइटिक एसिड निकल जाता है और मिनरल्स आसानी से अवशोषित हो जाते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें आयरन या जिंक की कमी है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च बताती है कि भिगोए हुए चावल का टेक्सचर और स्वाद बेहतर होता है। भीगे चावल जल्दी पकते हैं और नरम रहते हैं, जिससे खाना बनाने में आसानी होती है। भिगोने से चावल के एंजाइम्स कार्बोहाइड्रेट्स को आसान शुगर में बदलने में मदद करते हैं, जिससे पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।
साथ ही, चावल को भिगोने से उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो जाता है। ऐसे चावल खाने से ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए खासतौर पर लाभकारी है। सफेद चावल को 15–20 मिनट, बासमती चावल को 20–30 मिनट, ब्राउन राइस को 6–8 घंटे और साबुत अनाज वाले चावल को 8–12 घंटे भिगोना सही माना जाता है। भिगोने से पहले चावल को दो-तीन बार धोना भी जरूरी है।
हालांकि, सफेद चावल को ज्यादा देर तक पानी में नहीं भिगोना चाहिए, क्योंकि इससे विटामिन और मिनरल्स निकल सकते हैं और पोषण कम हो सकता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि चावल भिगोने की आदत सेहत के लिए लाभकारी है। यह पाचन में मदद करता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी सहायक है। (With inputs from IANS)