नई दिल्ली: स्वस्थ जीवनशैली के लिए सही डाइट का चुनाव करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। हाल ही में हुई रिसर्च में यह स्पष्ट हुआ है कि पौधों पर आधारित (plant-based) डाइट और मेडिटरेनियन डाइट दोनों ही स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, लेकिन कुछ अंतर भी हैं।
मेडिटरेनियन डाइट क्या है?
Mediterranean डाइट एक दिल-स्वस्थ खाने का तरीका है, जिसमें फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, दाल-बीन्स, नट्स, जैतून का तेल और सीमित मात्रा में मछली शामिल होती है, जो ग्रीस, इटली और स्पेन जैसे मेडिटरेनियन देशों की पारंपरिक डाइट पर आधारित है।
हाल ही में Frontiers in Nutrition में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अधिक वजन वाले वयस्कों में लो‑फैट वेगन डाइट और मेडिटरेनियन डाइट की तुलना की। अध्ययन में पाया गया कि पौधों पर आधारित डाइट अपनाने से वजन घटाने में अधिक लाभ हुआ — भले ही इसमें कुछ कम‑उत्तम पौधे जैसे रिफाइंड ग्रेन्स और आलू शामिल हों।
रिसर्च में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से पौधों पर आधारित डाइट लेते हैं, उनमें हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज़ और मोटापे का जोखिम कम होता है। वहीं, मेडिटरेनियन डाइट लेने वाले लोगों में भी हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है, सूजन कम होती है और जीवन प्रत्याशा बढ़ती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि पौधों पर आधारित डाइट में फल, सब्ज़ियाँ, दालें और नट्स प्रमुख होते हैं, जबकि मेडिटरेनियन डाइट में इन सबके साथ मछली और जैतून का तेल शामिल होता है। यह मिश्रण शरीर को आवश्यक पोषक तत्व और अच्छे फैट्स देता है, जो हृदय और मेटाबॉलिज़्म दोनों के लिए फायदेमंद हैं।
रिसर्च में यह भी सुझाव दिया गया है कि यदि कोई फ्लेक्सिटेरियन या “plant-forward” डाइट अपनाता है, यानी मुख्य रूप से पौधों पर आधारित लेकिन कभी-कभार मछली या चिकन भी शामिल करता है, तो स्वास्थ्य पर और भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्वस्थ रहने के लिए पौधों पर आधारित डाइट या मेडिटरेनियन डाइट दोनों ही असरदार हैं। मुख्य बात यह है कि संतुलित पोषण, फल-सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और अच्छे फैट्स शामिल किए जाएँ। विशेषज्ञों के अनुसार, थोड़ी लचीलापन वाली फ्लेक्सिटेरियन डाइट सबसे व्यावहारिक और असरदार विकल्प हो सकती है।