महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग क्यों? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताए 8 कड़वे सच जो हर महिला को जानने चाहिए

ग्लोबल लेवल पर महिलाओं की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग है. इस बारे में हर महिलाओं को जानना चाहिए.

Update: 2026-03-09 11:00 GMT

अक्सर यह माना जाता है कि हृदय रोग (Heart Disease) केवल पुरुषों की बीमारी है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. ग्लोबल लेवल पर महिलाओं की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग ही है. 'इंटरराष्ट्रीय महिला दिवस' के अवसर पर कार्डियोलॉजिस्ट और हार्ट ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. दिमित्री यारानोव ने महिलाओं के दिल की सेहत से जुड़े 8 ऐसे फैक्ट बताए हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है.

1. महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण

डॉ. यारानोव के अनुसार, हृदय रोग महिलाओं में मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण है. इसके बावजूद, लोग इसे पुरुषों की बीमारी समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे समय पर इलाज मिलने में देरी होती है.

2. अलग होते हैं हार्ट अटैक के लक्षण

पुरुषों की तरह महिलाओं को हमेशा छाती में तेज दर्द महसूस नहीं होता. महिलाओं में इसके लक्षण जी मिचलाना, अत्यधिक थकान, चक्कर आना, जबड़े में दर्द या सांस फूलना हो सकते हैं. इन लक्षणों को अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है.

3.महिलाओं के लिए अधिक घातक है हार्ट अटैक

सांख्यिकीय रूप से, हार्ट अटैक के बाद पहले साल में महिलाओं की मृत्यु की संभावना पुरुषों से अधिक होती है. इसका मुख्य कारण लक्षणों की देरी से पहचान और इलाज में होने वाली कोताही है.

4. धमनियों में 'प्लाक' का अलग व्यवहार

महिलाओं की धमनियों में प्लाक (गंदगी) जमा होने का तरीका पुरुषों से अलग हो सकता ह. यही कारण है कि पारंपरिक डायग्नोस्टिक टेस्ट कई बार महिलाओं में शुरुआती हृदय रोग को पकड़ने में विफल रहते हैं.

मानसिक स्वास्थ्य और दिल का कनेक्शन

डॉ. यारानोव बताते हैं कि तनाव (Stress), चिंता और अवसाद (Depression) का असर महिलाओं के दिल पर पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक गहरा होता है. भावनात्मक स्वास्थ्य सीधे तौर पर कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को प्रभावित करता है.

6. मेनोपॉज के बाद बढ़ता है खतरा

मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने लगता है. इससे ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल अनियंत्रित हो सकते हैं, जिससे हृदय रोगों का खतरा अचानक बढ़ जाता है.

7. इलाज में भेदभाव (Gender Gap)

स्टडी से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को समय पर सीपीआर (CPR), उचित दवाएं या जरूरी सर्जरी मिलने की संभावना कम होती है. यह स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद जेंडर गैप का एक डरावना सच है.

बचाव संभव है!

डॉ. यारानोव के अनुसार, लगभग सभी हृदय रोगों से बचा जा सकता है. एक स्वस्थ जीवनशैली, नियमित चेकअप और रिस्क फैक्टर्स (जैसे शुगर और बीपी) को कंट्रोल करके आप अपने दिल को सुरक्षित रख सकती हैं.

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