ज़हरीली हवा में बेअसर हो रही है कसरत: नई रिसर्च का बड़ा खुलासा
नई रिसर्च कहती है कि प्रदूषित हवा में की गई एक्सरसाइज़ अपने पूरे फायदे नहीं दे पाती।
न्यू दिल्ली: हम सभी जानते हैं कि नियमित एक्सरसाइज़ दिल को मज़बूत बनाती है, उम्र बढ़ाती है और कई बीमारियों का खतरा कम करती है। लेकिन एक नई ग्लोबल रिसर्च ने चौंकाने वाला सच सामने रखा है—अगर हवा ज़हरीली है, तो कसरत के फायदे आधे से भी कम हो जाते हैं।
द लैंसेट प्लानेटरी हेल्थ में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोग PM2.5 स्तर WHO की सीमा से ज़्यादा वाले इलाकों में एक्सरसाइज़ करते हैं, उनमें इंफ्लेमेशन मार्कर्स लगभग दोगुने तक बढ़ जाते हैं।
शोधकर्ताओं ने देखा कि महीन कणों वाले प्रदूषण के लगातार संपर्क में रहने से शरीर की नैचुरल एक्सरसाइज़-अडैप्टिव क्षमता कमज़ोर हो जाती है, जिससे कार्डियो-रेस्पिरेटरी फायदे घट जाते हैं और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है। यह नतीजे साफ़ बताते हैं कि एयर क्वालिटी सुधारना अब पब्लिक हेल्थ की प्राथमिक ज़रूरत बन चुका है।
इस बड़े विश्लेषण में दुनिया भर के 15 लाख से ज़्यादा वयस्कों का 10+ साल तक डेटा ट्रैक किया गया। नतीजे बताते हैं कि जहाँ हवा में PM2.5 प्रदूषण ज़्यादा है, वहाँ एक्सरसाइज़ के स्वास्थ्य लाभ 30% से गिरकर सिर्फ़ 12–15% रह जाते हैं। यानी शरीर मेहनत तो करता है, लेकिन ज़हरीली हवा असर को मिटा देती है।
एक शोधकर्ता ने कहा, “कसरत फ़ायदेमंद रहती है, लेकिन प्रदूषित हवा उसका असर कम कर देती है। लोग दिल और फेफड़ों के लिए जितनी मेहनत करते हैं, खराब हवा उतना ही नुकसान बढ़ा देती है।”
कारण साफ़ है—वर्कआउट के दौरान हम गहरी सांसें लेते हैं और ज़्यादा हवा अंदर जाती है। अगर यह हवा ज़हरीली हो, तो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है और दिल की सुरक्षा कम हो जाती है।
शहरी लोगों के लिए विशेषज्ञों की सलाह:
- AQI चेक करें और खराब हवा में बाहर की एक्सरसाइज़ से बचें।
- सुबह जल्दी या देर शाम वर्कआउट करें, जब प्रदूषण थोड़ा कम होता है।
- इंडोर एक्सरसाइज़ या एयर प्यूरिफायर वाले जिम का इस्तेमाल करें।
- दिल और फेफड़ों की नियमित जांच कराते रहें।
यह रिसर्च हमें एक महत्वपूर्ण सच्चाई समझाती है—फिटनेस सिर्फ़ हमारी मेहनत से नहीं, बल्कि हमारी हवा से भी तय होती है।
अगर हवा साफ़ नहीं, तो हमारी सबसे मेहनती दिनचर्या भी आधा असर दिखाती है।