मांसपेशियों को मजबूत कर गर्दन-पीठ के दर्द की छुट्टी करता है बाहुमूल-शक्ति-विकासक
यह व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत बनाकर गर्दन और पीठ के दर्द से राहत दिलाने में सहायक होता है।
नई दिल्ली: अव्यवस्थित जीवनशैली मानसिक और शारीरिक समस्याओं को बढ़ावा देती है, लेकिन नियमित योग अभ्यास से इनसे राहत पाई जा सकती है। ऐसी ही एक प्रभावी योग क्रिया है स्कन्ध तथा बाहुमूल-शक्ति-विकासक, जिसे सूक्ष्म व्यायाम की श्रेणी में रखा गया है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा द्वारा प्रोत्साहित यह अभ्यास खास तौर पर कंधों, बाहुमूल और ऊपरी शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका नियमित अभ्यास पूरे शरीर को लाभ पहुंचाता है। इससे गर्दन, कंधों और ऊपरी पीठ में लचीलापन बढ़ता है, तनाव कम होता है और शरीर को आराम मिलता है।
अभ्यास के दौरान पेट की मांसपेशियां (कोर), नितंब (ग्लूट्स) और जांघों की सामने वाली मांसपेशियां (क्वाड्रिसेप्स) सक्रिय रहती हैं, जिससे संतुलन और स्थिरता बेहतर होती है। यह कंधे और गर्दन के दर्द के साथ-साथ पीठ से जुड़ी समस्याओं में भी राहत देता है। नियमित अभ्यास से कंधे मजबूत, सुडौल और आकर्षक बनते हैं।
यह व्यायाम सरल है और घर पर आसानी से किया जा सकता है। लगातार अभ्यास करने से पोस्चर सुधरता है, तनाव घटता है और ऊपरी शरीर की ताकत बढ़ती है।
इसे करने के लिए ताड़ासन में सीधे खड़े हों। ठोड़ी को छाती से लगाएं और दोनों हाथों की मुट्ठी बंद कर लें। सांस अंदर लेते हुए कंधों को कानों की ओर ऊपर उठाएं और लगभग तीन सेकंड तक रोकें। फिर सांस छोड़ते हुए कंधों को धीरे-धीरे नीचे लाएं। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं और गति को नियंत्रित रखें।
योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्रिया शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक शांति भी प्रदान करती है। इसे नियमित दिनचर्या में शामिल कर आप रोजमर्रा की थकान और कंधों की जकड़न से राहत पा सकते हैं। (With inputs from IANS)