सिरदर्द के असली कारण हैं कब्ज और एसिडिटी, पेनकिलर नहीं; ये उपाय असरदार हैं

अक्सर सिरदर्द होते ही पेनकिलर ले लिया जाता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह जरूरी नहीं। सिर का दर्द अक्सर पेट और पाचन तंत्र की परेशानी का संकेत होता है।

Update: 2026-01-27 14:00 GMT

अक्सर लोग सिरदर्द होते ही तुरंत पेनकिलर लेने लगते हैं और सोचते हैं कि समस्या सिर में है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार ऐसा जरूरी नहीं है। सिर का दर्द अक्सर शरीर के किसी और हिस्से, खासकर पेट और पाचन तंत्र में गड़बड़ी का संकेत होता है।

सरल शब्दों में कहें तो सिरदर्द का असली कारण पेट की परेशानी हो सकती है। महर्षि सुश्रुत ने ‘सुश्रुत संहिता’ में बताया है कि सिरदर्द के कई प्रकार होते हैं और अधिकांश में वात, पित्त और कफ असंतुलित होकर सिर तक पहुँच जाते हैं। इसके पीछे अक्सर कब्ज, गैस या एसिडिटी जैसी समस्याएं होती हैं।

तीखा, तला-भुना या खट्टा भोजन करने से शरीर में पित्त बढ़ता है। यह पित्त रक्त के माध्यम से सिर तक पहुँचकर जलन, भारीपन और आंखों के पीछे दर्द पैदा करता है, जिसे लोग अक्सर माइग्रेन समझ लेते हैं। वहीं, पेट में फंसी गैस और जमा मल भी सिरदर्द का कारण बन सकते हैं। पेट में टॉक्सिन्स रक्त को दूषित कर मस्तिष्क पर असर डालते हैं। ऐसे में सिर्फ बाम लगाना या पेनकिलर लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

आयुर्वेद में सिरदर्द के लिए कई असरदार उपाय बताए गए हैं। नस्य क्रिया, यानी नाक में देसी घी की कुछ बूंदें डालना, पित्त को शांत करने और नसों को पोषण देने में मदद करता है। यदि दर्द एसिडिटी के कारण है, तो रात भर भिगोए हुए धनिया के पानी में मिश्री मिलाकर पीना लाभकारी होता है। कब्ज और गैस के लिए अविपत्तिकर चूर्ण और सूखे अदरक (सोंठ) का लेप भी सहायक है।

साथ ही, रोज पेनकिलर लेने से बचें। देर रात भारी भोजन न करें और बहुत ठंडा या बासी खाना न खाएं।

आधुनिक शोध भी मानता है कि पेट और दिमाग का सीधा संबंध है। जब पेट स्वस्थ रहेगा, तो सिरदर्द अपने आप कम हो जाएगा। इसलिए सिरदर्द के लिए केवल सिर पर ध्यान देने के बजाय, आहार और पाचन तंत्र को संतुलित रखना ज्यादा प्रभावी उपाय है।

With Inputs From IANS

Tags:    

Similar News