ग्रंथित मुद्रा से तनाव और बेचैनी में कमी, मन को मिलती है शांति
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान, घबराहट और चिड़चिड़ापन आम हो गया है। गलत दिनचर्या के कारण गले में भारीपन और आवाज बैठने जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
आज की तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में थकान, घबराहट, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। अनियमित दिनचर्या, देर तक स्क्रीन का इस्तेमाल, नींद की कमी और मानसिक दबाव का सीधा असर शरीर और मन दोनों पर पड़ता है। इसके साथ ही कई लोगों को गले में भारीपन, आवाज बैठना, बोलते समय थकान या बार-बार गला खराब रहने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
आयुष विशेषज्ञों के अनुसार, जब शरीर और मन के बीच संतुलन बिगड़ जाता है, तो ऐसी समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं। ऐसे में योग की कुछ सरल मुद्राएं न केवल शरीर को आराम देती हैं, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती हैं। इन्हीं आसान और प्रभावी योग अभ्यासों में से एक है ग्रंथित मुद्रा।
ग्रंथित मुद्रा हाथों से की जाने वाली एक सरल योग मुद्रा है, जिसका प्रभाव मुख्य रूप से गले, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है। इसका नियमित अभ्यास शरीर को भीतर से शांत करता है और मन को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है। रोजाना कुछ मिनट इस मुद्रा को करने से तनाव और मानसिक बोझ में कमी महसूस की जा सकती है।
इस मुद्रा का सबसे बड़ा लाभ गले की सेहत से जुड़ा माना जाता है। जिन लोगों को बार-बार आवाज बैठने, गले में जकड़न, भारीपन या बोलते समय थकान की शिकायत रहती है, उनके लिए ग्रंथित मुद्रा उपयोगी हो सकती है। यह गले के आसपास रक्त संचार को बेहतर बनाती है, जिससे जकड़न कम होती है और गले को आराम मिलता है।
ग्रंथित मुद्रा तनाव और घबराहट को कम करने में भी सहायक मानी जाती है। जब व्यक्ति लंबे समय तक मानसिक दबाव में रहता है, तो उसका असर बेचैनी, डर और चिड़चिड़ेपन के रूप में दिखने लगता है। इस मुद्रा के दौरान गहरी और शांत सांस लेने से दिमाग को आराम मिलता है और मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है।
नींद से जुड़ी समस्याओं में भी ग्रंथित मुद्रा लाभ पहुंचा सकती है। आजकल कई लोग देर रात तक जागते हैं, बार-बार नींद टूटती है या बेचैन सपनों से परेशान रहते हैं। सोने से पहले इस मुद्रा का अभ्यास करने से मन शांत रहता है, जिससे नींद गहरी और सुकूनभरी होती है।
इसके अलावा, ग्रंथित मुद्रा ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करती है। पढ़ाई करने वाले बच्चों, छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद मानी जाती है। नियमित अभ्यास से याददाश्त बेहतर होती है और काम पर ध्यान लंबे समय तक बना रहता है।
यह मुद्रा मन को हल्का करने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है। इससे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना कम होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति खुद को अधिक शांत और सकारात्मक महसूस करता है।
ग्रंथित मुद्रा को सुबह शांत वातावरण में या शाम के समय किया जा सकता है। रोजाना 10 से 15 मिनट तक इसका अभ्यास करना लाभकारी माना जाता है। नियमित अभ्यास से यह मुद्रा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
With Inputs From IANS