फिटनेस ट्रेंड या सेहत के लिए खतरा 'इंटरमिटेंट फास्टिंग', महिलाओं के लिए हो सकता है जोखिम भरा
इंटरमिटेंट फास्टिंग महिलाओं के लिए सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, इसलिए इसे अपनाने से पहले सावधानी जरूरी है।
नई दिल्ली: आज की तेज़ और व्यस्त जीवनशैली में लोग वजन घटाने और फिटनेस के लिए नए-नए डाइट ट्रेंड्स अपनाने लगे हैं। इनमें से एक लोकप्रिय तरीका है इंटरमिटेंट फास्टिंग, जिसे कई लोग “सर्वशक्तिमान उपाय” मान लेते हैं। सोशल मीडिया, फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और जिम कल्चर ने इसे इतना प्रचलित बना दिया है कि लोग बिना पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह के इसे अपनाने लगे हैं।
इंटरमिटेंट फास्टिंग का मूल सिद्धांत सरल दिखाई देता है—कुछ घंटों तक भोजन न करना और शेष समय में मनपसंद भोजन करना। हालांकि, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए हर डाइट सभी के लिए सुरक्षित नहीं हो सकती।
इस डाइट का प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारा पाचन तंत्र यानी अग्नि, एक निश्चित समय पर भोजन की मांग करता है। लंबे समय तक भूखे रहने से यह अग्नि कमजोर हो सकती है और शरीर में वात दोष बढ़ सकता है। यही कारण है कि फास्टिंग के दौरान कई लोगों को गैस, सिरदर्द, चक्कर, थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। आधुनिक विज्ञान भी बताता है कि भोजन की कमी से शरीर तनाव की स्थिति में चला जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर सबसे पहले दिखाई देता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग के कारण शरीर में कोर्टिसोल, जो एक स्ट्रेस हार्मोन है, बढ़ सकता है। इससे बेचैनी, घबराहट, नींद की कमी और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अक्सर लोग इसे समझ नहीं पाते कि उनकी चिड़चिड़ाहट या मूड फ्लक्चुएशन उनके डाइट का नतीजा है।
महिलाओं के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग और भी संवेदनशील हो सकता है। महिलाओं का हार्मोनल सिस्टम पुरुषों की तुलना में अधिक नाजुक होता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि अनियमित भोजन से शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक फास्टिंग करने से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, थायरॉयड की समस्याएं बढ़ सकती हैं और फर्टिलिटी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही, शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग मांसपेशियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। शरीर को समय पर पर्याप्त पोषण न मिलने पर यह मांसपेशियों को कमजोर कर देता है। परिणामस्वरूप, बाहर से शरीर पतला दिख सकता है, लेकिन अंदर से कमजोरी बनी रहती है। प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स जैसी आवश्यक पोषक तत्वों को सीमित समय में पूरा करना कठिन होता है।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर, बुजुर्ग और ईटिंग डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों के लिए यह डाइट खतरनाक साबित हो सकती है। ब्लड शुगर गिरने की स्थिति में बेहोशी या गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए किसी भी डाइट को अपनाने से पहले अपने शरीर की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति को समझना बेहद जरूरी है।
इस तरह, जबकि इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन घटाने में मददगार हो सकता है, इसके संभावित जोखिमों को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी डाइट या फास्टिंग पद्धति को अपनाने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। (With inputs from IANS)