क्या पूरे दिन गुनगुना पानी पीना सही है? आयुर्वेद से जानें सही नियम

आयुर्वेद के अनुसार गुनगुना पानी पाचन को सुधारता है, लेकिन इसे पूरे दिन पीने के कुछ सही नियम और सीमाएं भी होती हैं।

Update: 2026-02-11 09:45 GMT

नई दिल्ली: पानी केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह रक्त के साथ मिलकर शरीर के हर अंग तक ऑक्सीजन पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। मानव शरीर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि किस प्रकार का पानी और किस समय पीना अधिक लाभकारी होता है।

सदियों से सुबह उठते ही गुनगुना पानी पीने की परंपरा रही है। यह सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने वाली प्रक्रिया मानी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से पाचन अग्नि सक्रिय होती है, जिससे भोजन का पाचन बेहतर होता है और कफ दोष संतुलित रहता है।

हल्का गर्म पानी आंतों की गति को बढ़ाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। यह छाती में जमा कफ को ढीला कर बाहर निकालने में सहायक होता है। जो लोग वजन बढ़ने से परेशान हैं, उनके लिए भी गुनगुना पानी फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को बेहतर बनाता है।

हालांकि, गुनगुना पानी केवल सुबह ही नहीं, बल्कि दिन में भी लिया जा सकता है। भोजन से लगभग आधा घंटा पहले इसका सेवन पाचन शक्ति को मजबूत करता है और वजन नियंत्रण में मदद करता है। वहीं, भोजन के करीब एक घंटे बाद भी इसे पिया जा सकता है।

लेकिन कुछ स्थितियों में गुनगुना पानी पीने से बचना चाहिए। अत्यधिक प्यास या डिहाइड्रेशन की अवस्था में यह उचित नहीं है, क्योंकि इससे शरीर में गर्मी बढ़ सकती है। तेज गर्मी के मौसम में भी बहुत गर्म पानी लेने से असहजता या घबराहट हो सकती है। इसके अलावा, जिन लोगों को पित्त की समस्या या पेट में जलन रहती है, उन्हें गर्मियों में गुनगुना पानी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।

इस प्रकार, आयुर्वेद संतुलन पर जोर देता है—न तो अत्यधिक ठंडा पानी और न ही जरूरत से ज्यादा गर्म पानी, बल्कि मौसम और शरीर की प्रकृति के अनुसार सही चयन ही स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। (With inputs from IANS)

Tags:    

Similar News