पिंडलियों के दर्द से राहत: डाइट और एक्सरसाइज कारगर
बदलते मौसम का असर शरीर पर ज्यादा पड़ता है, और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने पर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
मौसम में होने वाले बदलावों का असर मानव शरीर पर काफी गहराई से पड़ता है, और यह प्रभाव सबसे पहले शरीर की समग्र कार्यप्रणाली तथा प्रतिरक्षा क्षमता पर देखने को मिलता है। जब मौसम अचानक बदलता है—चाहे वह सर्दी से गर्मी की ओर हो या फिर गर्मी से सर्दी की ओर—तो शरीर को उस परिवर्तन के अनुरूप खुद को ढालने में समय लगता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत नहीं है, तो उसका शरीर बाहरी संक्रमणों और मौसमी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण, थकान, बदन दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं, जिससे व्यक्ति की दैनिक जीवनशैली भी प्रभावित होती है।
कई लोगों के साथ हर मौसम में पैरों में दर्द, पैरों का ठंडा रहना और पिंडलियों में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। ऐसे में ठीक से चल पाना और सोने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा होता क्यों है।
पैरों में दर्द, पैरों का ठंडा रहना और पिंडलियों में दर्द की परेशानी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। यह पोषण तत्वों की कमी, रक्त संचार का सही तरीके से ना होना, विटामिन की कमी, नसों पर अत्याधिक दबाव और कमजोरी का कारण हो सकता है। आयुर्वेद में सरल घरेलू उपाय, सही डाइट और हल्की एक्सरसाइज से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए रोजाना गर्म पानी में पैरों को डुबोकर रखें। इसके लिए गर्म पानी में हल्दी और नमक को मिला लें और पिंडलियों तक पानी में कुछ मिनट तक डुबोकर रखें।
इससे रक्त का संचार बेहतर होगा, पैरों की नसों को आराम मिलेगा, थकावट कम होगी और रात के समय अच्छी नींद भी आएगी। इसके बाद तुरंत गुनगुने पुदीने के तेल से पिंडलियों और पैरों की हल्के हाथ से मालिश करें। इससे नसों पर पड़ने वाला अत्याधिक दवाब कम होता है।
कुछ हल्के व्यायाम को करने से भी पैरों के दर्द में आराम मिलेगा। इसके लिए कुर्सी पर बैठकर एक पैर को हवा में उठाएं और हाथ में गर्दन को भी ऊपर की तरफ उठाएं। पैर को आराम से नीचे लाएं और फिर गर्दन को आराम से नीचे ले जाएं। साथ ही, विपरीत करण आसन करें। इससे पैरों में रक्त संचार सही होगा और नसों की ब्लॉकेज की समस्या भी कम होगी।
व्यायाम के अलावा आहार में परिवर्तन करना भी जरूरी है। आहार में विटामिन-1 युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इसके साथ ही शरीर को हाइड्रेटेड रखते हुए खूब सारा पानी पिएं।
With Inputs From IANS