बिस्तर पर होने के बाद भी नींद न आने की समस्या: स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया और इसके कारण जानें

स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया में बिस्तर पर होने के बावजूद नींद नहीं आती।

Update: 2026-01-06 06:15 GMT

नई दिल्ली: आजकल कई लोगों के लिए रात में अच्छी नींद लेना भी चुनौती बन गया है। अक्सर लोग बिस्तर पर लेटने के बावजूद नींद न आने की समस्या का सामना करते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया कहा जाता है। यह सिर्फ एक सामान्य परेशानी नहीं है, बल्कि आपके दिनभर की ऊर्जा, मूड और सेहत पर भी असर डाल सकती है।

नींद की कमी से मस्तिष्क और शरीर दोनों थक जाते हैं, जिससे दिनभर तनाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सोने से ठीक पहले इनका इस्तेमाल मेलाटोनिन हॉर्मोन के उत्पादन को रोक देता है। आयुर्वेद इसे मानसिक अशांति और प्रकाश से उत्पन्न विकार मानता है। स्क्रीन की नीली रोशनी आंखों में पड़ने से मस्तिष्क सोचता है कि दिन खत्म नहीं हुआ, जिससे शरीर बिस्तर पर होने के बावजूद रिलैक्स नहीं करता और नींद नहीं आती।

इसके अलावा, कई लोग बिस्तर पर जाते ही दिनभर की घटनाओं या आने वाले कल की चिंताओं में खो जाते हैं। आयुर्वेद इसे चित्त विकार कहता है। जब मस्तिष्क लगातार अलर्ट मोड में रहता है, तो नींद की आवश्यकता होने के बावजूद शरीर को आराम नहीं मिलता। यह आदत बन जाने पर नींद न आने की समस्या बढ़ जाती है।

कैफीन का सेवन भी एक बड़ा कारण है, खासकर दोपहर के बाद चाय या कॉफी पीना। विज्ञान के अनुसार कैफीन का असर 6-8 घंटे तक शरीर में बना रहता है। शाम को कैफीन लेने पर रात में मस्तिष्क सक्रिय रहता है और नींद नहीं आती। आयुर्वेद इसे पित्त और वात के असंतुलन से जोड़ता है, जो शरीर को गर्म और उत्तेजित बनाए रखता है।

अनियमित सोने और जागने का समय भी स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया का कारण बन सकता है। रोज अलग-अलग समय पर सोने-जागने से शरीर को संकेत नहीं मिलता कि कब सोना है और कब जागना है। आयुर्वेद इसे शरीर की प्राकृतिक लय के विघटन के रूप में देखता है, जिससे नींद आने में देर होती है और नींद की गुणवत्ता कम हो जाती है।

नींद की समस्या दूर करने के लिए कुछ सरल उपाय मददगार साबित हो सकते हैं। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल कम करें और कमरे को अंधेरा रखें। हल्का संगीत सुनना, गहरी सांस लेना या आयुर्वेदिक हर्ब्स जैसे अश्वगंधा और ब्राह्मी का सेवन मानसिक शांति में सहायक होता है। दोपहर के बाद कैफीन से बचें और रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। आयुर्वेद के अनुसार यह वात और पित्त को संतुलित कर नींद को प्राकृतिक रूप से सुधारता है। (With inputs from IANS)

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