इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) क्या है? जानें इसके फायदे, नुकसान और वजन घटाने के सही तरीके
वजन घटाने और फिट रहने के लिए आजकल 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' (IF) का चलन काफी बढ़ गया है.
वजन घटाने और फिट रहने के लिए आजकल 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' (IF) का चलन काफी बढ़ गया है. लोग इसे तेजी से वजन कम करने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने का रामबाण इलाज मानते हैं. लेकिन क्या वाकई यह हर किसी के लिए फायदेमंद है? हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञ डॉ. त्रिशा पसरिचा के अनुसार, विज्ञान इस बारे में कुछ अलग ही कहानी कहता है.
क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग? (What is Intermittent Fasting?)
इंटरमिटेंट फास्टिंग खाने का एक पैटर्न है, जिसमें व्यक्ति दिन के एक निश्चित समय (जैसे 8 घंटे) में भोजन करता है और बाकी समय उपवास रखता है. कुछ लोग सप्ताह में एक या दो दिन का पूर्ण उपवास भी रखते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारना होता है.
इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे और साइड-इफेक्ट्स
इससे वजन कम करने, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने, रक्तचाप कम करने और हृदय रोगों के जोखिम को घटाने में मदद मिल सकती है. कैलोरी कम लेने से भूख का स्तर बढ़ जाता है. शुरुआत में शरीर नए ईटिंग पैटर्न में ढलने के दौरान सिरदर्द महसूस कर सकता है. इससे अपच, मतली (Nausea) और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। फाइबर युक्त भोजन लेकर इससे बचा जा सकता है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
डॉ. त्रिशा पसरिचा का कहना है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन घटाने का कोई स्थायी समाधान नहीं है. शोध बताते हैं कि यह कुछ महीनों के लिए वजन कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल होता है और वजन वापस बढ़ जाता है. इंसानों पर हुए अध्ययनों में अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि यह कैंसर से बचाने या उम्र बढ़ाने में सहायक है.
कब' खाने से ज्यादा 'क्या' खाना जरूरी है
डॉक्टर के अनुसार, 'कब' खाने से ज्यादा 'क्या' खाना जरूरी है. आप इन दो सरल स्टेप्स से फिट रह सकते हैं. सोकर उठने के एक घंटे के भीतर हाई-प्रोटीन और हाई-फाइबर वाला नाश्ता करें. मीठे अनाज (Cereals) या पेस्ट्री से बचें. एक अच्छी क्वालिटी का नाश्ता दोपहर के समय होने वाली 'स्नैकिंग' की आदत को कम करता है. रात में देर से खाना खाने या स्नैकिंग करने से शरीर कैलोरी बर्न करने के बजाय फैट स्टोर करने लगता है, जिससे मोटापे का खतरा बढ़ता है.