अगरतला गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज ने सफल टूथ रिइम्प्लांटेशन से लोगों के चेहरों पर लौटाई मुस्कान

अगरतला के इस हॉस्पिटल ने 'टूथ रिइम्प्लांटेशन' (टूटे हुए दांत को वापस जोड़ना) के सेक्टर में कई सफलताएं हासिल की हैं.

Update: 2026-01-17 07:00 GMT

अगरतला सरकारी डेंटल कॉलेज और आईजीएम (IGM) अस्पताल सभी उम्र के लोगों, खासकर बच्चों और किशोरों के लिए एडवांस्ड डेंटल ट्रीटमेंट का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है. अस्पताल का 'पेडोडोंटिक्स और प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री'(बाल दंत चिकित्सा) विभाग बच्चों के चेहरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

यह विभाग आधुनिक तकनीक और उपकरणों की मदद से बच्चों में होने वाली जटिल दांतों की समस्याओं का इलाज कर रहा है. हाल ही में इस विभाग ने 'टूथ रिइम्प्लांटेशन' (टूटे हुए दांत को वापस जोड़ना) के सेक्टर में कई सफलताएं हासिल की हैं.

कई केस हुए सॉल्व

केस 1- एक 9 वर्षीय बच्चा, जो 'बॉर्डरलाइन ऑटिज्म' से पीड़ित था, उसका सामने का दांत टूट गया था. परिजन उस दांत को कागज में लपेटकर तुरंत अस्पताल ले आए. डॉक्टरों ने समय रहते इलाज शुरू किया और दांत को सफलतापूर्वक वापस अपनी जगह लगा दिया.

केस 2 और 3- खेल-कूद के दौरान दांत गंवाने वाले दो 10 साल का एक बच्चे का भी विशेषज्ञों ने सटीक उपचार किया. इन दोनों मामलों में भी रिइम्प्लांटेशन प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही.

क्या करें जब दांत टूट जाए?

अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, यदि खेल-कूद या चोट के कारण दांत जड़ से बाहर निकल जाए, तो उसे वापस जोड़ा जा सकता है. इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. जैसे अगर टूटा हुआ दांत घटना के 30 मिनट के भीतर डॉक्टर के पास लाया जाए, तो उसके दोबारा जुड़ने की संभावना सबसे अधिक होती है.

टूटे हुए दांत को कभी भी सूखा या कागज में लपेटकर न रखें. डॉक्टर तक पहुंचने तक इसे सलाइन (नमक का पानी), ठंडे दूध या मरीज की अपनी लार में डुबोकर रखना चाहिए. इससे दांत की कोशिकाएं जीवित रहती हैं. दांत को उसकी जड़ से न पकड़ें, हमेशा ऊपर के हिस्से (क्राउन) से पकड़ें.

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