अल्जाइमर की पहचान अब सिर्फ एक 'फिंगर-प्रिक' टेस्ट से, वैज्ञानिकों ने शुरू किया बड़ा ट्रायल

अल्जाइमर रोग (Alzheimer's Disease) की पहचान करना अब उतना ही आसान हो सकता है जितना शुगर की जांच करना.

Update: 2026-01-20 08:45 GMT

अल्जाइमर रोग (Alzheimer's Disease) की पहचान करना अब उतना ही आसान हो सकता है जितना शुगर की जांच करना. वैज्ञानिकों ने एक अंतरराष्ट्रीय ट्रायल शुरू किया है जिसमें यह देखा जा रहा है कि क्या उंगली से खून की एक बूंद (Finger-prick blood test) लेकर इस घातक बीमारी का पता लगाया जा सकता है. यह Bio-Hermes-002 नामक अध्ययन ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा के 60 वर्ष से अधिक उम्र के 1,000 स्वयंसेवकों पर किया जा रहा है.

महंगे स्कैन और सुइयों से मिलेगी मुक्ति?

वर्तमान में अल्जाइमर के निदान के लिए PET स्कैन या लम्बर पंक्चर (रीढ़ की हड्डी से तरल पदार्थ निकालना) जैसे महंगे और दर्दनाक टेस्ट की आवश्यकता होती है. ये टेस्ट न केवल खर्चीले हैं बल्कि इनमें समय भी बहुत लगता है. ब्रिटेन में केवल 2% मरीजों को ही ये एडवांस टेस्ट मिल पाते हैं.

ऐसे में, यह नया ब्लड टेस्ट गेमचेंजर साबित हो सकता है क्योंकि इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है. सैंपल को लैब में भेजने के लिए रेफ्रिजरेशन (ठंडा रखने) की जरूरत नहीं होती. यह कम खर्चीला और सरल है.

प्रोटीन के जरिए होगी पहचान

अल्जाइमर सोसाइटी के अनुसार, एमाइलॉयड (Amyloid) और टाऊ (Tau) जैसे प्रोटीन लक्षण दिखने से 15 साल पहले ही मस्तिष्क में जमा होने लगते हैं. लाइफआर्क (LifeArc) की डॉ. जियोवाना लल्ली ने बताया कि यह टेस्ट रक्त में मौजूद इन खास प्रोटीन (Blood-based biomarkers) के स्तर का विश्लेषण करता है, जिससे यह पता चलता है कि किसी व्यक्ति को अल्जाइमर का खतरा है या नहीं.

ट्रायल में शामिल एक डॉक्टर का अनुभव

लंदन के जीपी डॉ. माइकल सैंडबर्ग, जिन्होंने अपनी मां को अल्जाइमर से जूझते देखा था, इस ट्रायल का हिस्सा बने. उनके टेस्ट के नतीजे नेगेटिव आए. उन्होंने इसे एक "बड़ी राहत" बताते हुए कहा, "ज्ञान ही शक्ति है. बिना महंगे स्कैन के जोखिम का पता लगाना वाकई उत्साहजनक है."

अल्जाइमर सोसाइटी की प्रो. फियोना कार्राघेर के अनुसार, नई दवाओं के आने के साथ ही बीमारी का शुरुआती और सटीक निदान (Early Diagnosis) प्राथमिकता होनी चाहिए. इस ट्रायल में 2028 तक नतीजे आने की उम्मीद है. अगर यह सफल रहा, तो यह दुनिया भर में डिमेंशिया (Dementia) की स्क्रीनिंग के तरीके को पूरी तरह बदल देगा.

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