डेंगू की गंभीरता और विटामिन D का संबंध, क्या कम विटामिन D बढ़ा रहा है खतरा?
भारत में डेंगू का बोझ लगातार बढ़ रहा है. नवंबर 2025 तक देश में लगभग 1.13 लाख मामले और 95 मौतें दर्ज की गईं.
भारत जैसे देश में, जहां डेंगू और विटामिन D की कमी (Vitamin D Deficiency) दोनों ही बड़े स्तर पर मौजूद हैं, एक नए शोध ने स्वास्थ्य जगत की चिंता बढ़ा दी है. कोलंबिया में हुए एक क्लिनिकल अध्ययन, जिसे इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR) में प्रकाशित किया गया है, ने यह खुलासा किया है कि शरीर में विटामिन D की कमी डेंगू संक्रमण को और अधिक गंभीर बना सकती है.
यह शोध विशेष रूप से उन मरीजों पर केंद्रित था जो प्रयोगशाला-पुष्टि (Lab-confirmed) डेंगू से पीड़ित थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों में डेंगू के हल्के लक्षण थे, उनमें विटामिन D का स्तर बेहतर था. गंभीर डेंगू या चेतावनी वाले लक्षणों (Warning Signs) वाले मरीजों में विटामिन D की भारी कमी देखी गई.miRNA-155 नामक अणु, जो प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को नियंत्रित करता है, विटामिन D की कमी वाले गंभीर मरीजों में बढ़ा हुआ पाया गया. यह शरीर में अनियंत्रित सूजन (Inflammation) का संकेत देता है.
विटामिन D और गंभीर डेंगू के बीच का विज्ञान
एम्स (AIIMS) के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आर. गोस्वामी के अनुसार, यह अध्ययन पिछले सबूतों को और मजबूती देता है. विटामिन D की कमी सीधे तौर पर 'डेंगू हैमरेजिक फीवर' (Dengue Haemorrhagic Fever) से जुड़ी हो सकती है. यह शोध एक संभावित मैकेनिज्म की ओर इशारा करता है, जहाँ विटामिन D की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली के असंतुलन का कारण बनती है, जिससे संक्रमण और गंभीर हो जाता है.
भारतीय संदर्भ में डेंगू की स्थिति (2025-26)
भारत में डेंगू का बोझ लगातार बढ़ रहा है. नवंबर 2025 तक देश में लगभग 1.13 लाख मामले और 95 मौतें दर्ज की गईं. भारत की एक बड़ी आबादी पहले से ही विटामिन D की कमी से जूझ रही है. ऐसे में, डेंगू और विटामिन D की कमी का यह संगम भारतीय मरीजों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है.
विशेषज्ञों की राय: बचाव ही उपचार है
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के डॉ. पंकज सोनी और सर गंगा राम अस्पताल के डॉ. अतुल गोगिया का मानना है कि विटामिन D की कमी को दूर करना डेंगू का इलाज नहीं है, लेकिन यह एक 'सुधारने योग्य जोखिम कारक' (Modifiable Risk Factor) है. गंभीर डेंगू अक्सर 'साइटोकाइन स्टॉर्म' (Cytokine Storm) की वजह से होता है. विटामिन D शरीर की सूजन और वायरस की प्रतिकृति (Viral Replication) को कम करने में मदद कर सकता है.विटामिन D के सामान्य स्तर को बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए बुद्धिमानी है, खासकर मानसून के मौसम में जब डेंगू चरम पर होता है.
सावधानी और अगला कदम
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लोग स्व-उपचार (Self-medication) से बचें. विटामिन D की खुराक लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. भारत में इस विषय पर और अधिक बड़े स्तर के परीक्षणों (Trials) की जरूरत है ताकि यह समझा जा सके कि क्या विटामिन D सप्लीमेंटेशन से डेंगू की मृत्यु दर को कम किया जा सकता है.