दुनियाभर में 2040 तक प्लास्टिक के चलते स्वास्थ्य जोखिम दोगुने होने की संभावना : स्टडी

स्टडी के मुताबिक 2040 तक प्लास्टिक प्रदूषण से स्वास्थ्य खतरे तेजी से बढ़ सकते हैं।

Update: 2026-01-29 05:45 GMT

नई दिल्ली: अगर प्लास्टिक के मौजूदा उत्पादन और उपयोग के तरीकों में जल्द ठोस बदलाव नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में इसका प्रदूषण और उससे जुड़ा स्वास्थ्य संकट और गंभीर हो जाएगा। एक नई स्टडी के मुताबिक 2040 तक प्लास्टिक से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम दोगुने तक बढ़ सकते हैं।

द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि प्लास्टिक का पूरा जीवनचक्र — फॉसिल फ्यूल निकालने से लेकर निर्माण, इस्तेमाल और कचरे के निपटान तक — हर चरण में इंसानों और पर्यावरण के लिए हानिकारक तत्व छोड़ता है। क्योंकि 90 प्रतिशत से अधिक प्लास्टिक फॉसिल फ्यूल से बनता है, इसलिए इसकी शुरुआत से ही प्रदूषण शुरू हो जाता है।

शोधकर्ताओं ने 2016 से 2040 के बीच प्लास्टिक की खपत और कचरा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न परिदृश्यों का स्वास्थ्य पर प्रभाव आंका। यदि मौजूदा व्यवस्था बिना बदलाव जारी रही, तो प्लास्टिक से जुड़ा स्वास्थ्य नुकसान दोगुना हो सकता है। इसमें लगभग 40 प्रतिशत असर जलवायु परिवर्तन से, 32 प्रतिशत वायु प्रदूषण से और 27 प्रतिशत जहरीले रसायनों के संपर्क से जुड़ा होगा।

अध्ययन में बताया गया कि इन प्रभावों से कैंसर और अन्य गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ता है, खासकर प्लास्टिक के निर्माण और खुले में जलाने के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान होता है।

रिसर्च के अनुसार, 2016 में प्लास्टिक से स्वास्थ्य को करीब 2.1 मिलियन स्वस्थ जीवन वर्षों का नुकसान हुआ था, जो 2040 तक बढ़कर 4.5 मिलियन तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर इस अवधि में 83 मिलियन स्वस्थ जीवन वर्ष कम हो सकते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि केवल कचरा संग्रह और रीसाइक्लिंग काफी नहीं है। नए प्लास्टिक के उत्पादन पर नियंत्रण, गैर-जरूरी उपयोग में कटौती और पुन: उपयोग योग्य सामग्री अपनाने से ही स्वास्थ्य जोखिमों को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है। (With inputs from IANS)

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