पीओजेके में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, डॉक्टरों ने 26 जनवरी से हड़ताल की दी चेतावनी

पीओजेके में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर डॉक्टरों ने 26 जनवरी से हड़ताल की चेतावनी दी है।

Update: 2026-01-13 09:45 GMT

इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओजेके) में स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फोरम (यूडीएफ) ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी लंबे समय से लंबित और वैध मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो 26 जनवरी से विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

यूडीएफ, पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) और पीओजेके की यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन (वाईडीए) से जुड़ा संगठन है। यूडीएफ के चेयरमैन डॉ. वाजिद खान और जनरल सेक्रेटरी डॉ. अरशद राजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को यह अल्टीमेटम दिया। इस दौरान डॉ. वकार बट, डॉ. बशारत हयात, डॉ. आमिर इकराम, डॉ. राजा इम्तियाज और डॉ. बिलाल अहमद सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर सरकारी उदासीनता और वर्षों से चली आ रही देरी से बेहद नाराज़ हैं। यूडीएफ नेताओं ने कहा कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सभी संवैधानिक, कानूनी और लोकतांत्रिक रास्ते अपनाए, लेकिन सरकार लगातार फैसले टालती रही।

डॉ. वाजिद खान ने कहा कि मुद्दे सुलझने के बजाय और उलझते जा रहे हैं, जिससे पूरे हेल्थकेयर सिस्टम में अनिश्चितता बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में प्रमोशन प्रक्रिया ठप पड़ी है और 2019 से कई मामले लंबित हैं, जिसके कारण कई डॉक्टर बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो चुके हैं।

यूडीएफ ने स्थायी डायरेक्टर जनरल की नियुक्ति न होने पर भी सवाल उठाए और कहा कि विभाग को अतिरिक्त प्रभार के सहारे नहीं चलाया जा सकता। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जून 2022 से वित्तीय लाभ और अलाउंस न मिलने पर गहरी चिंता जताई गई।

डॉक्टरों ने सरकारी अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का भी मुद्दा उठाया। पूरे क्षेत्र में सिर्फ एक एमआरआई मशीन होना बेहद चिंताजनक बताया गया। इसके अलावा महिला डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को मिल रही सुरक्षा धमकियों, अस्पतालों में मारपीट की घटनाओं और एकतरफा पुलिस कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई गई।

यूडीएफ ने ऐलान किया कि 26 जनवरी से दो घंटे की प्रतीकात्मक हड़ताल शुरू होगी, जो दो सप्ताह तक चलेगी। इस दौरान ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी, जबकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी। यदि 2 फरवरी तक मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो अस्पतालों को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी भी दी गई है। (With inputs from IANS)

Tags:    

Similar News