ICMR की बड़ी पहल, अब एक ही टेस्ट से होगी कई बीमारियों की पहचान, इलाज में नहीं होगी देरी

एक ही बार में कई प्रमुख रोगजनकों (Pathogens) की पहचान करने में सक्षम होगा.

Update: 2026-01-21 07:30 GMT

अक्सर जब कोई मरीज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या गंभीर बीमारी के लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंचता है, तो डॉक्टर उसे डेंगू, इन्फ्लूएंजा, कोविड-19 और टाइफाइड जैसे कई टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं. फिलहाल ये टेस्ट एक-एक करके (Sequentially) किए जाते हैं. अगर पहला टेस्ट नेगेटिव आता है, तो दूसरे की बारी आती है. इस प्रक्रिया में कीमती समय बर्बाद होता है और सही इलाज शुरू होने में देरी हो जाती है.

मल्टीप्लेक्स टेस्ट (Multiplex Test) क्या है?

ICMR जिस तकनीक पर काम कर रहा है, उसे 'मल्टीप्लेक्स मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट' कहा जाता है. यह एक ही बार में कई प्रमुख रोगजनकों (Pathogens) की पहचान करने में सक्षम होगा. इससे बीमारी के संदेह और उसके पुख्ता निदान के बीच का समय काफी कम हो जाएगा.

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) पर लगाम

AIIMS के माइक्रोबायोलॉजी प्रोफेसर डॉ. हितेंद्र गौतम के अनुसार, जब तक टेस्ट रिपोर्ट नहीं आती, डॉक्टर अक्सर मरीज को 'ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स' देना शुरू कर देते हैं. अगर रिपोर्ट आने में देरी होती है और एंटीबायोटिक का उपयोग जारी रहता है, तो शरीर में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (दवाओं का बेअसर होना) का खतरा बढ़ जाता है. ICMR की 2024 की रिपोर्ट में भी यह चिंता जताई गई है कि सामान्य एंटीबायोटिक्स अब बैक्टीरिया पर कम प्रभावी हो रही हैं.

महामारी और आउटब्रेक में मिलेगी मदद

कोविड-19 महामारी के अनुभवों से सीखते हुए, ICMR ने माना है कि संक्रमण का पता लगाने में देरी से बीमारियां चुपचाप फैलती हैं. नया सिंड्रोम-आधारित (Syndrome-based) टेस्ट भारत के रोगों के बोझ और राष्ट्रीय निगरानी डेटा के आधार पर तैयार किया जाएगा.

स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा

ICMR भारतीय निर्माताओं और शोध संस्थानों को इन डायग्नोस्टिक किटों को विकसित और स्केल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. इसके लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं, जिन्हें जमा करने की अंतिम तिथि 25 जनवरी है.

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