निपाह वायरस के खिलाफ बड़ी कामयाबी, जापान की नई वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण शुरू

निपाह वायरस (Nipah Virus) के खिलाफ अब एक प्रभावी हथियार मिलने की उम्मीद जगी है.

Update: 2026-02-06 06:00 GMT

दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में से एक, निपाह वायरस (Nipah Virus) के खिलाफ अब एक प्रभावी हथियार मिलने की उम्मीद जगी है. जापान के शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस घातक वायरस के खिलाफ विकसित वैक्सीन के मानवीय क्लीनिकल ट्रायल (Clinical Trial) की घोषणा की है. यह कदम तब उठाया गया है जब हाल ही में भारत के पश्चिम बंगाल में भी निपाह के मामले सामने आए थे.

टोक्यो विश्वविद्यालय की नई पहल

टोक्यो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह वैक्सीन अप्रैल में बेल्जियम में अपना क्लीनिकल ट्रायल शुरू करेगी. निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस वैक्सीन का उद्देश्य निपाह संक्रमण से होने वाली मौतों को रोकना है। आपको बता दें कि निपाह वायरस की मृत्यु दर 40% से 75 प्रतिशत के बीच आंकी गई है, जो इसे कोरोना से भी कहीं अधिक खतरनाक बनाती है।

वैक्सीन कैसे काम करती है?

  • इस वैक्सीन को विकसित करने की तकनीक काफी अनूठी है. खसरा वायरस (Measles Virus) का उपयोग- शोधकर्ताओं ने निपाह वायरस की आनुवंशिक जानकारी का एक हिस्सा खसरे के वायरस में डाला है.
  • इम्यून सिस्टम को मजबूती- जब यह वैक्सीन इंसानों को दी जाती है, तो शरीर निपाह वायरस जैसे एंटीजन प्रोटीन पैदा करता है। इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) सक्रिय हो जाती है और भविष्य में होने वाले संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार हो जाती है.
  • सुरक्षित आधार-खसरे के वायरस का उपयोग दुनिया भर में टीकों के लिए पहले से ही सुरक्षित रूप से किया जा रहा है.

परीक्षण के कई चरण

पशु परीक्षण (Animal Trials)-हम्सटर (Hamsters) पर किए गए परीक्षणों में यह वैक्सीन पहले ही प्रभावी और सुरक्षित साबित हो चुकी है.

फेज 1 ट्रायल-इंसानों पर सुरक्षा की पुष्टि के लिए पहले चरण के ट्रायल में 60 लोगों को शामिल किया जाएगा.

ऑक्सफोर्ड का प्रयास- इसी बीच, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने भी दिसंबर में बांग्लादेश में अपने वैक्सीन उम्मीदवार का फेज 2 ट्रायल शुरू किया है, जिसमें लगभग 300 लोग हिस्सा ले रहे हैं.

निपाह वायरस: क्यों है यह इतना खतरनाक?

निपाह एक ज़ूनोटिक (Zoonotic) बीमारी है, जो मुख्य रूप से चमगादड़ों से इंसानों में फैलती है. यह दूषित भोजन, संक्रमित सूअरों या संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से भी फैल सकता है.

इसके लक्षण

इसके लक्षण बिना किसी संकेत (Asymptomatic) से लेकर गंभीर श्वसन संबंधी समस्याओं तक हो सकते हैं.

गंभीर मामलों में यह **एनसेफलाइटिस (दिमाग की सूजन) का कारण बनता है, जो जानलेवा साबित होता है.

वर्तमान में, निपाह के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त टीका या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है, यही कारण है कि यह वैक्सीन एक बड़ी उम्मीद है.

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